सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आशुतोष रांका और सौरव दास को लेकर होने वाली सुनवाई में देरी को लेकर सवाल उठाए हैं. 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद 18 अक्टूबर को उनकी एसीईएम कोर्ट में सुनवाई होना थी, जो अभी तक नहीं हो सकी है.
दीपके ने रत्ना सिंह के मीडिया में दिए बयान को रिपोस्ट करते हुए कहा है कि सरकार जानबूझकर आशु और सौरव की अवैध गिरफ्तारी को लंबा खींच रही है. इसके लिए वह हर तरह के हथकंडे अपना रहे हैं, ताकि अदालती कार्यवाही में देरी हो, और रिहाई न हो सके.
देरी करने वाली चालें चल रहे हैं: दीपके
दीपके ने कहा है कि उन्हें जेल में रखने को कोई कानूनी आधार नहीं है, इसलिए वे उन्हें वहां रोके रखने के लिए देरी कराने वाली चालें चल रहे हैं.
The state is deliberately prolonging Ashu and Saurav’s illegal arrest by using every dirty trick in the book to delay court proceedings and prevent their release. They have no legal grounds to keep them behind bars, so they are resorting to delaying tactics to keep them there.
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) October 18, 2026
सुबह 12 बजे होनी थी सुनवाई: रत्ना सिंह
सीजेपी की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पहली बात यह सुनवाई सुबह 12 बजे होना थी. उसको टाल-टालकर यह शाम पांच बजे तक लाए हैं. कोई हमें खबर नहीं दी गई है, कि हियरिंग होना है या नहीं होना है. सत्यापन प्रक्रिया को लेकर भी कुछ नहीं हुआ है. सौरव के साथ क्या है, आशु के साथ क्या है, सीधे आए हैं, और बोला है कि धमकी भरे मैसेज आ रहे हैं. हमारे लॉयर ने काउंटर किया है, कि जिसने धमकी दी है, उसपर कार्रवाई कीजिए, लेकिन क्यों इनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं?
रत्ना सिंह ने क्या दी जानकारी?
रत्ना ने आगे कहा कि तो वो कह रहे हैं कि मैं नहीं सुनूंगा, मैं कल आऊंगा. वो वहां से उठने को थे, तब पब्लिक प्रोसिक्यूटर, जो वहां पर थे, उन्होंने अपनी आवाज उठाई तो, वो कह रहे थे कि हम में से कोई है, जिसने वो धमकी भरा मैसेज भेजा है.
सवाल यह है कि किसी ने भी उनको मैसेज भेजा हो, लेकिन वो इस केस से कैसे जुड़ा है. कुछ न कुछ कारण बता कर वो इस केस में देरी कर रहे हैं.
रत्ना सिंह ने लगाया षडयंत्र का आरोप
रत्ना सिंह ने साथ ही आशुतोष और सौरव को रिहा न करने के पीछे षडयंत्र रचने का आरोप लगाया. केस में किसी तरह की प्रक्रिया को अंजाम नहीं दिया गया है. इसके अलावा उन्होंने सरकारी वकील और पुलिस की मिलीभगत के आरोप भी लगाए.
'धमकी भरे मैसेज रिहाई कैसे रोक सकते हैं'
रत्ना सिंह ने पूछा है कि आखिर धमकी भरे मैसेज से किसी की रिहाई कैसे रोक सकते हैं? उन्होंने इस हिरासत को गैर कानूनी करार दिया है. यह सरकार की तरफ से और दिल्ली पुलिस की तरफ से साजिश है. वो सौरभ और आशुतोष को अंदर रखना चाहते हैं. ये पूरा मन बना कर बैठे हैं कि उन दोनों को यहां से रिहा नहीं करना है. साथ ही उन्होंने कहा है कि यह हमारा सिर्फ समय खराब कर रहे हैं.
न्यायिक हिरासत में हैं आशुतोष-सौरभ
दरअसल, आशुतोष रांका और सौरव दास के मामले में 18 अक्टूबर को एसईएम कोर्ट में सुनवाई होनी थी. दोनों नेताओं को 14 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद 5 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था. ऐसे में आज फैसला आने की उम्मीद थी. अब इस पर सीजेपी के नेताओं ने गंभीर आरोप सरकार, ज्यूडिशियल कार्रवाई और दिल्ली पर मढ़े हैं.
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