हमारे देश में हर साल गाड़ियों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. अभी पिछले महीने रिकॉर्ड बिक्री देखने को मिली है. जबकि कारों की लगातार बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य में प्रदूषण को बढ़ सकता है. लेकिन प्रदूषण को लेकर सरकार हर तरह कि कोशिश कर रही है कि इसको कम किया जाए. प्रदूषण को बढ़ते देख अब फिर से एक बार देश में बीएस-VII लागू होने की चर्चा जोरों पर है. बता दें कि प्रदूषण को हमारे देश से कम करने में बीएस-VII को बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है.
क्योंकि जैसे ही यह लागू होगा उसके बाद कार, एसयूवी, बाइक और भारी कमर्शियल वाहनों के इंजन तकनीक में बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा. तो चलिए विस्तार से जानते हैं कि बीएस-VII नॉर्म्स के लागू होने से भारतीय ऑटो बाजार और वाहन चालकों की जिंदगी पर इसका क्या असर पड़ने वाला है.
जानकारी दें दे कि गाड़ियों से निकलने वाले जहरीले धुएं और प्रदूषण को कंट्रोल करने के लिए सरकार कुछ मानक तय करती है. जिन्हें एमिशन नॉर्म्स कहा जाता है. भारत में अभी बीएस-VI नियमों का पालन किया जा रहा.
लेकिन लगातार बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए अब बीएस-VII के नियमों की तैयारी चल रही है. इस नियम के लागू होते ही इन गाड़ियों से नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक कणों का लेवल बेहद कम हो जाएगा. जिसके चलते गाड़ियों से कम प्रदूषण निकलेगा और हमारे देश के नागरिकों को राहत मिलेगी.
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आपको बता दें कि बीएस-VII के नियमों को पूरा करने के लिए ऑटोमोबाइल कंपनियों को अपने इंजनों की बनावट में बड़ा बदलाव करना होगा. इसमें कैटेलिटिक कन्वर्टर और एग्जॉस्ट सिस्टम को पहले से कहीं ज्यादा बेहतर बनाया जाएगा जिससे जहरीली गैसों को तुरंत फिल्टर किया जा सके.
जबकि पेट्रोल और डीजल दोनों तरह के इंजनों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि वे कम फ्यूल जलाकर भी बेहतर और अच्छा परफॉर्मेंस दें. हालांकि इस तकनीक को विकसित करने में कंपनियों का खर्च बढ़ेगा जिसका असर गाड़ियों की लागत पर भी पड़ सकता है.

यह नया नियम अप्रैल 2029 से सभी गाड़ियों पर लग जायेंगे. एक्सपर्ट के मुताबिक जब यह नियम तरह लागू हो जाएंगे तो मार्केट में आने वाली नई कारों और बाइकों की दामों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है. क्योंकि कार कंपनियों को अपने वाहनों के इंजन को अपडेट करने के लिए अब बड़ा अमाउंट निवेश करना पड़ रहा है.
जिसके चलते कंपनियां वाहनों की कीमत बढ़ा सकते हैं. लेकिन बढ़ती कीमत के साथ-साथ ग्राहकों को कम प्रदूषण फैलाने वाली और ज्यादा एडवांस गाड़ियां भी मिलेंगी. जो लोग आने वाले समय में वाहन खरीदने की सोच रहे हैं उनके बजट पर इसका थोड़ा बहुत प्रभाव जरूर देखने को मिल सकता है.

आपको बता दें कि केवल गाड़ियों के इंजन बदलने से ही प्रदूषण पूरी तरह कंट्रोल नहीं हो जायेगा. इसलिए इसमें इस्तेमाल होने वाले फ्यूल की गुणवत्ता का सुधरना भी जरूरी है. जिसके चलते तेल कंपनियों को भी बीएस-VII मानकों के अनुकूल अति-शुद्ध पेट्रोल और डीजल का उत्पादन करना होगा. जिसमें सल्फर की मात्रा बेहद कम हो और जब गाड़ियों में अच्छे क्वालिटी वाला ईंधन जलेगा तो इंजन ली लाइफ भी बढ़ेगी और धुआं भी नाममात्र ही निकलेगा.
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