दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस किसी को हिरासत में लेकर दूर छोड़ दे, घर लौटने के पैसे न हों या पुलिस कार्रवाई में कोई घायल हो जाए तो उसकी मदद कौन करेगा? ऐसे लोगों के लिए 25 साल के राजीव चौधरी सहारा बन रहे हैं। कॉमर्स से ग्रैजुएट राजीव ने AI की मदद से ऐसा सिस्टम तैयार किया है, जिसके जरिए हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों तक मुफ्त कानूनी मदद, इलाज और घर लौटने की सुविधा पहुंचाई जा रही है। राजीव का दावा है कि उनकी ' डिटेनी घर वापसी योजना ' से अब तक 1,800 से ज्यादा लोगों को मदद मिल चुकी है। पेश है राजीव चौधरी से खास बातचीतः








डिटेनी घर वापसी योजना क्या है?यह योजना पुलिस हिरासत में लिए गए लोगों की मदद के लिए है। किसी को कानूनी मदद चाहिए तो हमारी टीम मुफ्त में मदद करती है। किसी को चोट लगी है या फर्स्टएड की जरूरत है तो स्वास्थ्यकर्मी पहुंचते हैं। हिरासत से छूटने के बाद घर लौटने में परेशानी हो तो कार, टिकट या दूसरी व्यवस्था करके उन्हें घर पहुंचाते हैं।








यह पूरा सिस्टम कैसे काम करता है?एंथ्रोपिक के AI मॉडल Claude से मैंने एक पर्सनल डैशबोर्ड बनाया है। पुलिस किसी को हिरासत में लेती है तो हमें वॉलंटियर्स या हिरासत में लिए गए लोगों से सूचना मिलती है। कई बार पुलिस गाड़ी की लोकेशन भी मिल जाती है। रिहाई के बाद हम उस इलाके में मौजूद अपने वॉलंटियर कार ड्राइवर से संपर्क करते हैं। वे लोगों को घर या नजदीकी बस स्टैंड और मेट्रो स्टेशन तक पहुंचाते हैं। जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्यकर्मी भी मदद करते हैं।








लोगों की और किस तरह मदद करते हैं?हम 7 तरह से मदद कर रहे हैं। इनमें घर पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्ट, मुफ्त कानूनी मदद, प्रदर्शन से जुड़ी सही जानकारी देना, लोगों को गुमराह होने से बचाने के लिए क्रिएटर नेटवर्क से जोड़ना, नए वॉलंटियर्स जोड़ना, पुलिस या सिस्टम से परेशान लोगों की मदद करना और जरूरतमंदों तक स्वास्थ्यकर्मी पहुंचाना शामिल है।








मदद की सूचना कैसे मिलती है?लोग इंस्टाग्राम, कॉल या मेसेज से संपर्क करते हैं। हमारी टीम के दो-तीन सदस्य 24 घंटे सक्रिय रहते हैं। प्रदर्शन वाली जगहों पर वॉलंटियर्स लोगों को संपर्क करने का तरीका बताते हैं। इंस्टाग्राम पर @yoursafespaceguy पर संपर्क कर सकते हैं।








इसकी शुरुआत कैसे हुई? अब तक कितने लोगों की मदद की?20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में देखा कि कई लोगों के पास घर लौटने तक के पैसे नहीं थे। तब करीब 300 लोगों को घर भेजने का इंतजाम किया। शुरुआत गूगल डॉक्स से की थी। इस बार जरूरतमंद ज्यादा थे, इसलिए Claude से डैशबोर्ड बनाया। अब तक 800 लोगों को घर पहुंचाया और एक हजार से ज्यादा लोगों को कानूनी मदद दिलाई। हमारे साथ 200 से ज्यादा वॉलंटियर अपनी कार के साथ जुड़े हैं।








पुलिस से डर नहीं लगता? खर्च कहां से आता है?मैं गलत क्या कर रहा हूं, जो डरूं? लोगों की मदद करना मेरा संवैधानिक अधिकार है। Claude का खर्च खुद उठाता हूं। बाकी सभी वॉलंटियर हैं। हम किसी से पैसे नहीं मांगते। पुलिस भी चाहती है कि हिरासत से छूटने वालों को लेने कोई आ जाए।








अपने बारे में बताइए?मैं मुंबई का रहने वाला हूं, फिलहाल दिल्ली में हूं। कॉमर्स से ग्रैजुएशन किया है। AI में शुरू से दिलचस्पी रही है। पेशे से बिजनेस चलाने में लोगों की मदद करता हूं। सामान्य परिवार से हूं, कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है। लोगों की मदद करना अच्छा लगता है। आगे भी प्रदर्शनों में जरूरतमंदों की मदद करता रहूंगा।

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