नई SUV खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो गाड़ी की कीमत के साथ उसकी मासिक EMI का हिसाब लगाना भी जरूरी है. Kia Sorento और Toyota Innova Hycross दोनों उन ग्राहकों के लिए दिलचस्प विकल्प हो सकती हैं, जो बड़ी फैमिली के लिए आरामदायक गाड़ी चाहते हैं. हालांकि, दोनों की कीमत और फीचर्स में अंतर है, इसलिए खरीदने से पहले अपनी जरूरत और बजट को समझना जरूरी है.
एक हालिया रिपोर्ट में दोनों SUVs के बेस और टॉप वेरिएंट की अनुमानित कीमतों के आधार पर EMI की तुलना की गई है. इस गणना में 9.5 प्रतिशत सालाना ब्याज दर और चार साल की लोन अवधि मानी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, Sorento की EMI ज्यादा हो सकती है. हालांकि, ध्यान रखें कि ये आंकड़े तुलना के लिए दिए गए अनुमान हैं. गाड़ी की वास्तविक कीमत, उपलब्धता और बैंक की शर्तों के आधार पर खर्च बदल सकता है.
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रिपोर्ट में Kia Sorento के बेस वेरिएंट की अनुमानित एक्स-शोरूम कीमत 27.99 लाख रुपये मानी गई है. इस पूरी रकम को लोन मानकर चलें, तो चार साल की अवधि और 9.5 प्रतिशत सालाना ब्याज दर पर इसकी अनुमानित EMI करीब 70,320 रुपये प्रति माह बनती है. वहीं, टॉप वेरिएंट की अनुमानित कीमत 38.49 लाख रुपये मानी गई है. इसके लिए मासिक EMI करीब 96,699 रुपये बताई गई है. यानी टॉप वेरिएंट खरीदने पर हर महीने लगभग एक लाख रुपये की किस्त चुकानी पड़ सकती है. हालांकि, ये कीमतें और EMI तुलना में इस्तेमाल किए गए आंकड़े हैं, इन्हें भारत में आधिकारिक कीमत या पक्की खरीदारी की पेशकश नहीं समझना चाहिए. खरीदने से पहले Kia के आधिकारिक ऐलान और उपलब्ध वेरिएंट की जानकारी जरूर जांचें.
Toyota Innova Hycross की बात करें, तो रिपोर्ट में इसके बेस वेरिएंट की एक्स-शोरूम कीमत 18.70 लाख रुपये मानी गई है. इस रकम पर चार साल के लोन और 9.5 प्रतिशत ब्याज दर के हिसाब से EMI करीब 46,980 रुपये प्रति माह बताई गई है. वहीं, टॉप वेरिएंट की अनुमानित कीमत 31.84 लाख रुपये है, जिसकी EMI करीब 79,992 रुपये प्रति माह बनती है. इन आंकड़ों के मुताबिक, बेस वेरिएंट की तुलना में Sorento की EMI करीब 23,340 रुपये ज्यादा है. वहीं, टॉप वेरिएंट के मामले में दोनों की मासिक EMI का अंतर करीब 16,707 रुपये है. इस तरह, दिए गए अनुमान के आधार पर Innova Hycross की मासिक किस्त दोनों स्तरों पर कम बैठती है.
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि EMI का हिसाब इस मान्यता पर आधारित है कि पूरी एक्स-शोरूम कीमत का लोन लिया जा रहा है. वास्तविक खरीदारी में ग्राहक आमतौर पर डाउन पेमेंट भी करते हैं. डाउन पेमेंट जितना ज्यादा होगा, लोन की रकम और मासिक किस्त उतनी कम हो सकती है. इसके अलावा, एक्स-शोरूम कीमत में रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन, इंश्योरेंस और अन्य शुल्क शामिल नहीं होते. इन खर्चों के जुड़ने से ऑन-रोड कीमत बढ़ जाती है. बैंक की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और लोन की अवधि भी अंतिम खर्च को प्रभावित कर सकती है. लंबी अवधि चुनने पर EMI कम हो सकती है, लेकिन कुल ब्याज ज्यादा चुकाना पड़ सकता है. इसलिए सिर्फ मासिक किस्त देखकर फैसला न लें. दोनों SUVs के फीचर्स, जगह, इस्तेमाल, सर्विस खर्च और अपनी आर्थिक स्थिति की तुलना करने के बाद ही खरीदारी का निर्णय लें.
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