गयाजी: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला में 13bवें दिन का खास महत्व होता है। 13वें दिन आश्विन कृष्ण त्रयोदशी तिथि होती है। इस बार भी पंडाजी की उपस्थिति में पिंडदानियों ने दीप जलाकर अपने पुरखों का आह्वान किया। परिवार के लोगों अपने पूर्वजों की शांति और मोक्ष के लिए इस दिन विशेष पूजा, श्राद्ध, तर्पण और दीप दान किया। इसमें दीप दान का महत्व है। दक्षिण दिशा की ओर दीपक जलाने से पितरों का मार्ग प्रकाशमय होता है और वो प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
यमराज खुद भेजते हैं पुरखों को पृथ्वी परये पौराणिक मान्यता है कि आश्विन कृष्ण त्रयोदशी के दिन से रात तक यमराज पितरों को पृथ्वी लोक पर स्वयं भेजते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पुरखे सूक्ष्म काया के माध्यम से पृथ्वी पर आते हैं। जब वो अपने वंशजों को पिंडदान करते देखते हैं, दीपदान करते देखते हैं तो वो बहुत ही प्रसन्न होते हैं और बिना वंशजों को सुख समृद्धि का आशीर्वाद दिए बिना वापस नहीं लौटते हैं।
दीप दान से प्रसन्न होकर पितर देते हैं आशीर्वादजितेंद्र सिंघानिया छत्तीसगढ़ रायपुर से परिवार के साथ पिंडदान तर्पण करने के लिए गयाजी आए हैं। गुरुवार को देव दिवाली थी और उन्होंने भी इसे मनाया। उन्होंने कहा कि 'आज का महत्व है कि आज पितृ देवता अपने परिवारजनों को आज के दिन दीपक जलाने से काफी प्रसन्न होते हैं। आज गयाजी में देव दिवाली के मौके पर दीपक जलाकर उत्साहित है। और यहां की व्यवस्था बहुत अच्छी है। पुलिस प्रशासन की ओर से बहुत व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए अच्छी की गई है। यहां आकर बहुत अच्छा लगा। यहां देव घाट के पास आतिशबाजी करना मना है, नहीं तो हम आतिशबाजी करने के लिए पटाखे भी लाए थे। अभी हम कुछ देर और यहां पर रहेंगे यहां का मनोरम दृश्य अच्छा लग रहा है।'
आज दीप दान का का बहुत ही महत्व: पुरोहित राकेश शास्त्रीइस संबंध में राकेश शास्त्री पुरोहित, जो गयाजी के रहने वाले हैं, उन्होंने कहा कि 'आज पितृ दिवाली है। आज त्रयोदशी तिथि को दिवाली मनाया जाता है। इस दिन का विशेष महत्व रहता है आज का दिन और अपने परिवार के सदस्यों को आशीर्वाद देते हैं। पितृ दीवाली आज के दिन दीप जलाकर मनाया जाता है, जिससे पितृ देवता प्रफुल्लित होकर आशीर्वाद देते हैं। इससे वंशजों के परिवार में सुख समृद्धि विकास का आगमन होता है। हमारे जजमान रांची (झारखंड) से आए हैं और हमने उनका विधिवत कर्मकांड कराया।'
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