साल 2026 में सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है. इसे देखते हुए निवेशकों को लग सकता है कि यह सोने पर दांव लगाने का शानदार मौका है. लेकिन ऐसा कोई कदम उठाने से पहले यह जानना जरूरी है कि एक्सपर्ट्स इस पर क्या कह रहे हैं ताकि कहीं ऐसा न हो कि आपका लगाया गया दांव आपका ही नुकसान करा जाए.
रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में सोने की कीमत अपने हाई लेवल 5,595 डॉलर प्रति औंस पर थी और अब यह 4,138 डॉलर के स्तर पर आ गई है, जो सीधे लगभग 26% की गिरावट को दर्शाता है. 6 अक्टूबर के लेटेस्ट स्पॉट मार्केट डेटा से पता चलता है कि सोना आज लगभग 4,129 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा है.
टाटा म्यूचुअल फंड की अक्टूबर 2026 की एक रिपोर्ट में लॉन्ग टर्म के लिए सोने और चांदी को लेकर सकारात्मक रुख दिखाया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि सोने की कीमतों में हालिया गिरावट मुख्य रूप से US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर के मजबूत होने जैसे मैक्रो-इकोनॉमिक वजहों से आई है. इसका मांग से कोई लेना-देना नहीं है.
सोने में गिरावट की एक बड़ी वजह मजबूत डॉलर इंडेक्स है. ग्लोबल लेवल पर जब भी डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी कंरेसीज में निवेशकों के लिए इसे खरीदना महंगा हाे जाता है इसलिए कहीं न कहीं इसका असर इसकी मांग पर जरूर पड़ता है.
US ट्रेजरी यील्ड में बढ़त भी एक बड़ी वजह है, जिससे सोने की कीमतें गिरी हैं. अमेरिका में सरकारी बॉन्ड ट्रेजरी यील्ड पर रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशक सोने जैसी गैर-ब्याज वाली सुरक्षित संपत्तियों से पैसा निकालकर ज्यादा मुनाफे के चक्कर में वहां लगाने लगते हैं, जिससे मांग घटती जाती है. कीमतों में यह गिरावट अल्पकालिक और पूरी तरह से बाहरी आर्थिक बदलावों के कारण है.
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