देश के छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए सरकार बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. 10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड को कैबिनेट से मंजूरी मिलने की उम्मीद है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय कैबिनेट 6 अक्टूबर को इस प्रस्ताव पर विचार कर सकती है. ये फंड उन छोटे कारोबारियों और कंपनियों के लिए खास है, जिनमें आगे बढ़ने और बड़ा कारोबार बनने की क्षमता है, लेकिन पैसों की कमी के कारण वे अपनी ग्रोथ को तेजी नहीं दे पा रहे हैं. 


दरअसल, सरकार ने इस फंड का ऐलान यूनियन बजट 2026-27 में किया था. इसका मकसद ऐसे कारोबारों को इक्विटी सपोर्ट देना है, जो आगे विस्तार कर सकते हैं और बड़े बिजनेस बन सकते हैं. 


10000 करोड़ रुपये का फंड क्यों चाहिए?


MSME देश की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा हैं. छोटे शहरों से लेकर बड़े औद्योगिक इलाकों तक लाखों कारोबारी इसी सेक्टर में काम करते हैं. लेकिन कई छोटे कारोबारों के सामने सबसे बड़ी परेशानी पूंजी की होती है. कारोबार बढ़ाना हो, नई मशीन खरीदनी हो, उत्पादन बढ़ाना हो या नया बाजार पकड़ना हो, हर जगह पैसों की जरूरत पड़ती है.


ऐसे में बैंक लोन हर कारोबारी के लिए आसान ऑप्शन नहीं होता है. सरकार का ये फंड ऐसे ही कारोबारों को आगे बढ़ने के लिए इक्विटी सपोर्ट देने के मकसद से बनाया गया है.


किसे मिलेगा फायदा?


ये फंड हर MSME को सीधे पैसा बांटने वाली योजना नहीं है. सरकार ने इसे चुनिंदा मानदंडों के आधार पर संभावनाओं वाले उद्यमों को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया है. यानी ऐसी कंपनियां जिनमें आगे तेजी से बढ़ने की क्षमता है, उन्हें इस फंड के जरिए इक्विटी सपोर्ट दिया जा सकता है. सरकार का लक्ष्य ऐसे कारोबार तैयार करना है जो आगे चलकर बड़े और मजबूत भारतीय उद्यम बन सकें. 


क्या ये लोन होगा?


एसएमई ग्रोथ फंड कोई बैंक लोन नहीं है. सरकार ने इसे MSMEs के लिए इक्विटी सपोर्ट के तौर पर प्रस्तावित किया है. इसका मकसद ऐसे कारोबारों में ग्रोथ कैपिटल पहुंचाना है, जिन्हें कारोबार बढ़ाने के लिए पूंजी की जरूरत है. इसलिए इस फंड का फायदा लेने की प्रक्रिया सामान्य बिजनेस लोन से अलग हो सकती है.


क्या सिर्फ पैसों से मदद कर रही है सरकार?


नहीं, सरकार ने बजट 2026-27 में MSME सेक्टर के लिए तीन स्तरों पर जैसे इक्विटी सपोर्ट, लिक्विडिटी सपोर्ट और प्रोफेशनल सपोर्ट का प्लान रखा था.


इसके तहत 10,000 करोड़ के एसएमई ग्रोथ फंड के अलावा आत्मनिर्भर भारत कोष में 2,000 करोड़ का एक्स्ट्रा सपोर्ट देने का भी प्रस्ताव है. इसका मकसद माइक्रो एंटरप्राइजेज को जोखिम पूंजी तक पहुंच बनाए रखने में मदद करना है. इसके अलावा सरकार ने MSMEs की पेमेंट और वर्किंग कैपिटल की परेशानी दूर करने के लिए TReDS से जुड़े कई उपायों का भी ऐलान किया है.


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