हिंदुस्तान की सड़कों पर पहले विदेशी कंपनियों का बोलबाला था और हमें दूसरे देश की कंपनी की गाड़ी ही सड़कों पर देखने को मिलती थी. लेकिन धीरे-धीरे समय बदला और अब इंडिया की कई कंपनियां है जिनके आगे विदेशी ऑटोमोबाइल कंपनी भी घुटने टेक दिए हैं. मारुती सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा ने भारत में अपनी गाड़ियों का क्रेज अलग ही लेवल का कर दिया है. बता दें कि, अब भारतीय ऑटो इंडस्ट्री केवल इंडिया में ही नहीं बल्कि वर्ल्ड लेवल पर धूम मचा रही हैं. ऐसा हम नहीं बल्कि ताजा रिपोर्ट्स बता रही हैं.
क्योंकि अभी हाल ही में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि चल रहे वित्त वर्ष में अप्रैल से जुलाई के बीच हमारे देश से 20 लाख से ज्यादा गाड़ियों का निर्यात किया गया है. यह आंकड़ा यह साबित जरूर करता है कि विदेशी खरीदार अब भारतीय ऑटोमोबाइल ब्रांड्स की क्वालिटी, मजबूती और आधुनिक फीचर्स पर आंख बंद कर भरोसा कर रहे हैं. चलिए विस्तार से जानतें हैं पूरी जानकारी.
ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल अप्रैल से जुलाई के चार महीनों के दौरान भारतीय ऑटो इंडस्ट्री ने नया रिकॉर्ड बनाया है. क्योंकि इन चार महीनों में कुल 20 लाख से अधिक वाहनों का एक्सपोर्ट किया जा चुका है. यह डेटा पिछले साल की इस समय के मुकाबले काफी ज्यादा है.
जबकि एक्सपोर्ट में हुई इस बढ़ोतरी में टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स और पैसेंजर कार्स तीनों का बेहद अहम योगदान रहा है. लेकिन विशेष रूप से पैसेंजर गाड़ियों और बजट सेगमेंट के टू-व्हीलर्स ने ओवरसीज मार्केट में जबरदस्त प्रदर्शन किया है. वहीं विदेशी बाजारों में गाड़ियों की बढ़ती बिक्री ने भारत को दुनिया के प्रमुख ऑटो एक्सपोर्ट हब के रूप में स्थापित कर दिया है.

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बता दें कि विदेशों में भारतीय गाड़ियों की लगातार बढ़ती मांग के पीछे कई बड़े कारण हैं. सबसे पहला कारण है इनकी कम कीमत और शानदार माइलेज. भारतीय कंपनियां बहुत कम खर्च में एडवांस्ड फीचर्स और दमदार सेफ्टी वाली गाड़ियां ऑफर कर रही हैं. जबकि इसके अलावा भारतीय गाड़ियों की मेंटेनेंस कॉस्ट काफी कम होती है.
जो मध्यम वर्गी विदेशी खरीदारों को बहुत आकर्षित करती है. कंपनियों ने अब अपनी गाड़ियों की डिजाइनिंग और बिल्ड क्वालिटी पर भी काफी काम किया है. यही वजह है कि विदेशी ग्राहक अब अन्य ग्लोबल ब्रांड्स की तुलना में भारतीय कंपनियों की बनी कारों और बाइक्स को ज्यादा महत्व दे रहे हैं.

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अब बात करते हैं कि किन देशों में भारतीय गाड़ियों की डिमांड सबसे ज्यादा है. तो इसमें अफ्रीका, लैटिन अमेरिका, साउथ-ईस्ट एशिया और मिडिल ईस्ट के देशों का नाम शामिल है. इन जगहों के रोड इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखते हुए इंडिया की गाड़ियां बिल्कुल फिट बैठती हैं. नाइजीरिया, मेक्सिको, कोलंबिया और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में भारतीय टू-व्हीलर्स और कमर्शियल गाड़ियों का बोलबाला है.
जबकि इसके साथ ही अब कई विकसित देशों में भी भारत से बनी पैसेंजर कारों का शिपमेंट भेजा जा रहा है. भारतीय कंपनियों ने इन देशों के सख्त सेफ्टी और एमिशन नियमों का पालन करते हुए गाड़ियां तैयार की हैं. जिससे उनकी मार्केट में डिमांड और ज्यादा बढ़ गई है.
जानकारी दें दे कि भारतीय ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री का भविष्य बेहद उज्ज्वल नजर आ रहा है. क्योंकि एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले समय में एक्सपोर्ट का यह आंकड़ा और नए रिकॉर्ड तोड़ेगा. अब भारतीय कंपनियां इलेक्ट्रिक व्हीकल्स के एक्सपोर्ट पर भी तेजी से काम कर रही हैं. भारत में बनी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर्स की मांग कई देशों में शुरू हो चुकी है.
वहीं सरकार की पीएलआई स्कीम जैसी नीतियों से भी ऑटो मेकर्स को लोकल मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट बढ़ाने में बहुत मदद मिल रही है. अगर यही रफ्तार कायम रही तो जल्द ही भारत दुनिया का सबसे बड़ा व्हीकल एक्सपोर्टर बनने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा लेगा.
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