इंटरनेट तमाम लोगों की जिंदगी का एक ऐसा जरूरी हिस्सा बन चुका है जिसके बिना एक पल भी बिताना मुश्किल लगता है. घर से ऑफिस का काम करना हो ऑनलाइन क्लास अटेंड करनी हो या फिर ओटीटी पर फिल्में देखनी हों हर जगह इंटरनेट की जरूरत पड़ती है. इंटरनेट की जरूरत को पूरा करने के लिए ज्यादातर लोगों को घरों में वाईफाई कनेक्शन होता है.
जब हम अपने घर में नया वाईफाई कनेक्शन लगवाने की सोचते हैं तो सबसे बड़ा कन्फ्यूजन यही होता है कि तार वाला यानी वायर्ड कनेक्शन लिया जाए या फिर बिना तार वाला वायरलेस कनेक्शन बेहतर रहेगा. दोनों ही ऑप्शन्स के अपने फायदे और अपनी कुछ कमियां होती हैं. जिनके बारे में पहले ही पता कर लेना चाहिए.
कई लोग जल्दी कनेक्शन लगवाने के चक्कर में गलत कनेक्शन चुन लेते हैं और बाद में स्लो स्पीड और बफरिंग से परेशान होते हैं. अगर आप भी इन दिनों अपने घर के लिए नया इंटरनेट कनेक्शन लगवाने की सोच रहे हैं. तो जान लें आपके घर के लिए क्या बेहतर रहेगा वायर्ड कनेक्शन या फिर बिना तार वाला वायरलेस कनेक्शन.
सबसे पहले बात करते हैं ट्रेडिशनल तार वाले यानी वायर्ड इंटरनेट कनेक्शन की जिसमें फाइबर-ऑप्टिक, कोएक्सियल केबल या फिर टेलीफोन लाइन के जरिए आपके घर तक सीधा इंटरनेट पहुंचाया जाता है. इस तरह के कनेक्शन का सबसे बड़ा फायदा इसकी सुपर-फास्ट स्पीड और बेहतरीन स्टेबिलिटी है. चूंकि डेटा सीधे फिजिकल केबल के जरिए आपके मॉडम तक पहुंचता है इसलिए इसमें सिग्नल टूटने या आसपास की रुकावटों का कोई चक्कर नहीं रहता.
रिपोर्ट्स के मुताबिक भी वायर्ड कनेक्शन वायरलेस के मुकाबले कहीं ज्यादा स्टेबल होते हैं और आसानी से एक से पांच जीबीपीएस तक की धांसू स्पीड दे डालते हैं. अगर आपके घर में एक साथ कई लोग ऑनलाइन गेमिंग करते हैं. बड़े-बड़े फाइल्स डाउनलोड करते हैं या फिर लगातार 4K वीडियो स्ट्रीमिंग करते हैं. तो तार वाला कनेक्शन आपके लिए बेस्ट है. इसके अलावा यह कनेक्शन कम खर्च में आपको अनलिमिटेड हाई-स्पीड डेटा देता है.

अब अगर बात करें वायरलेस इंटरनेट कनेक्शन की तो इसमें घर के अंदर तक किसी भी तरह के तारों का जाल नहीं बिछाना पड़ता. इस तकनीक में आपके घर में एक छोटा सा गेटवे डिवाइस या राउटर लगा दिया जाता है. जो ठीक आपके मोबाइल फोन की तरह पास के 5जी या 4जी टावर से सीधे कनेक्ट होकर इंटरनेट के सिग्नल खींचता है. इस कनेक्शन का सबसे बड़ा फायदा आसान इंस्टॉलेशन. आपको अपनी दीवारों में ड्रिल करके छेद करने या लंबे-लंबे तारों को छुपाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती.
आप खुद ही मुख्य राउटर को बिजली के बोर्ड में प्लग करके इसे आसानी से चालू कर सकते हैं. यह उन लोगों के लिए सही होता है जिनके किराए के घरों, गलियों या सोसाइटियों में फाइबर केबल का जाल नहीं बिछा होता है. हालांकि इसमें तार वाले कनेक्शन जितनी रॉ स्पीड तो नहीं मिलती. लेकिन आम ब्राउज़िंग, सोशल मीडिया और रोज के कामों के लिए यह बेहद आरामदायक और सुविधाजनक ऑप्शन माना जाता है.

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अब सवाल यह उठता है कि आखिर आपके लिए इनमें से कौन सा ऑप्शन चुनना सही साबित होगा. अगर आप एक ऐसे यूजर हैं जिसे बिना किसी रुकावट के तेज स्पीड चाहिए, घर में ऑनलाइन गेमिंग का शौक है और आपके इलाके में फाइबर केबल आसानी से उपलब्ध है. तो आपको आंख बंद करके तार वाला वायर्ड कनेक्शन ही चुनना चाहिए. यह लंबे समय तक बिना किसी परेशानी के आपको बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है और बजट में भी फिट बैठता है.
वहीं अगर आप उनमें से हैं जो बार-बार घर बदलते रहते हैं बार-बार तार लगाने की टेंशन नहीं रखना चाहते और आपकी जरूरतें भी ज्यादा नहीं हैं. तो वायरलेस इंटरनेट आपके लिए एकदम परफेक्ट रहेगा. अपनी जरूरत और बजट का सही आकलन करके ही फैसला लें.
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