प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने GST के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) से जुड़े मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ज्ञान चंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और राज जायसवाल को गिरफ्तार किया है. ईडी ने दोनों को बुधवार (30 सितंबर, 2026) को PMLA के तहत गिरफ्तार किया था. दोनों को अगले दिन गुरुवार (1 अक्टूबर) को रांची की विशेष PMLA अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है.
ईडी ने यह कार्रवाई 30 सितंबर को जमशेदपुर और कोलकाता में चार अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी के बाद की. ये ठिकाने ज्ञान चंद जायसवाल, CA संजय पारेख और अन्य लोगों से जुड़े थे. छापेमारी के दौरान ईडी को कई अहम दस्तावेज और डिजिटल उपकरण भी मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया है.
135 फर्जी कंपनियां बनाकर 5,000 करोड़ के बिल
ईडी की जांच में सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में 135 ऐसी कंपनियां बनाई गई थीं, जो सिर्फ कागजों पर चल रही थीं. इन कंपनियों के जरिए बिना किसी सामान या सेवा की वास्तविक सप्लाई के 5,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के फर्जी बिल जारी किए गए.
इन फर्जी बिलों के आधार पर 734 करोड़ रुपये से ज्यादा का फर्जी ITC तैयार किया गया और आगे दूसरी कंपनियों को कमीशन के बदले दिया गया. इन कंपनियों ने फर्जी ITC का इस्तेमाल अपनी GST देनदारी कम करने के लिए किया.
जायसवाल परिवार से जुड़ी कंपनियों के जरिए 54.33 करोड़ का ITC
ED के मुताबिक, ज्ञान चंद जायसवाल उर्फ बबलू जायसवाल और राज जायसवाल इस फर्जी ITC नेटवर्क के प्रमुख लाभार्थियों में शामिल थे. जांच में सामने आया कि उन्होंने अपने और परिवार के सदस्यों के नाम पर कई कंपनियां बनाई थीं. इनमें Maa Sharda Endeavours Pvt. Ltd., Makers Casting Pvt. Ltd. और Kedarnath Trexim Pvt. Ltd. शामिल है.
इसके अलावा, कर्मचारियों के नाम पर भी Jai Bhole Enterprises जैसी कंपनियां बनाई गईं. ईडी का आरोप है कि इन कंपनियों के जरिए करीब 54.33 करोड़ रुपये का फर्जी ITC घुमाया गया. बाद में यह पैसा उनके निजी बैंक खातों, रिश्तेदारों और उनसे जुड़ी दूसरी संस्थाओं के खातों तक पहुंचाया गया. ईडी के मुताबिक, अपराध से अर्जित आय का इस्तेमाल कारोबार में लगाने के साथ-साथ चल और अचल संपत्तियां खरीदने में भी किया गया.
पहले भी हो चुकी छापेमारी
इस मामले में ED इससे पहले 2025 के मई और अगस्त महीने में भी कई जगहों पर छापेमारी कर चुका है. कोलकाता, जमशेदपुर, रांची और अन्य स्थानों पर हुई इन कार्रवाइयों में कई दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए थे. इसके अलावा, करीब 70 लाख रुपये की नकदी और बैंक खातों में जमा रकम को फ्रीज किया गया था.
ED ने इस मामले में अब तक 20 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्तियों से जुड़े दो प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) भी जारी किए हैं. वहीं, 8 मई 2025 को चार आरोपियों को PMLA के तहत गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से तीन आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं. मामले में ईडी की तरफ से रांची की विशेष PMLA अदालत में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट भी दाखिल की जा चुकी है और सुनवाई चल रही है. एजेंसी ने कहा कि मामले में आगे की जांच जारी है.
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