जय़पुर: राजस्थानी में कहावत है कि 'लाडो की बुआ बनना'। हिंदी में इसे आप 'फटे में टांग अड़ाना' भी कह सकते हैं। जब दो पक्ष राजी हो और फिर भी कोई तीसरा पंचायती है तो उसका हश्र बुरा होना तय है। ऐसा ही हुआ जयपुर में। एक पुलिस अफसर ने फटे में टांग अड़ाई। दो पक्षों में राजीनामा होने के बाद भी रुपए मांगने लगा। फिर क्या था। एक पीड़ित ने एसीबी में शिकायत कर दी। इसके बाद एसीबी ने पुलिस अफसरों को रिश्वत लेते रंगे हाथों धर लिया।




दो पक्षों में विवाद के बाद हुआ था राजीनामाजयपुर के सांगानेर सदर इलाके में कुछ दिनों पहले दो पक्षों में विवाद हुआ था। विवाद के बाद दोनों पक्षों ने अपनी अपनी ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने दोनों पक्षों को पाबंद किया और एक पक्ष के व्यक्ति की पिकअप गाड़ी जब्त की। सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) महेश चंद मीणा मामले के जांच अधिकारी थे। बाद में दोनों पक्षों में राजीनामा हो गया। राजीनामे के बाद भी जांच अधिकारी महेश चंद बोला कि पिकअप छोड़ने की एवज में 20 हजार रुपए देने होंगे क्योंकि कोर्ट में राजीनामा पेश करना होगा। केस में एक व्यक्ति को मुल्जिम नहीं बनाने की एवज में भी 20 हजार रुपए मांगे थे।




घूस मांगने की शिकायत पहुंची एसीबीदोनों पक्षों में राजीनामे के बाद भी जब एएसआई महेश चंद ने पिकअप वाहन छोड़ने की एवज में रिश्वत मांगी तो परिवादी ने एसीबी में शिकायत कर दी। सत्यापन कराए जाने पर शिकायत सही पाई गई। तकाजा करने पर एएसआई 10 हजार रुपए में राजी हो गया। गुरुवार सुबह एएसआई ने परिवादी को रिश्वत की रकम लेकर थाने पर बुलाया तो पुलिस टीम भी अलर्ट हो गई। दोपहर को एसीबी की टीम ने सांगानेर सदर थाने में ही एएसआई को 10 हजार रुपए लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।




जींस की जेब में रखे थे नोटएसीबी की एडीजी स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि रिश्वत लेने की सूचना मिलते ही एसीबी की टीम ने दबिश दी। दबिश के दौरान ही परिवादी ने बताया था कि सहायक उप निरीक्षक महेश चंद मीणा ने रिश्वत की रकम अपनी जींस की जेब में रखी है। एसीबी की टीम ने एएसआई महेश चंद को पकड़ा और उसके जींस की जेब तलाशी। तलाशी के दौरान रिश्वत के रूप में ली गई रकम बरामद हो गई। इसके बाद एसीबी की टीम ने महेश चंद को गिरफ्तार कर लिया। एसीबी की दूसरी टीम एएसआई महेश के घर की तलाशी ले रही है।

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