आज महीने का आखिरी दिन है और अब धीरे-धीरे सबके अकाउंट में सैलरी क्रेडिट होनी शुरू हो जाएगी. हालांकि, 17 सितंबर 2026 से लागू EPFO (Employees' Provident Fund Organisation) के नए नियम के बाद अब कन्फ्यूजन इस बात को लेकर है कि क्या सितंबर महीने की आने वाली सैलरी कटकर आएगी या नहीं. आइए पीएफ कटौती का पूरा हिसाब आपको समझाते हैं. 


केंद्र सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत अनिवार्य पीएफ कवरेज की सैलरी लिमिट (Wage Ceiling) को पहले के 15,000 से बढ़ाकर 25,000 रुपया प्रति माह कर दिया है और यह नया नियम 17 सितंबर 2026 से लागू हो चुका है. मतलब कि पहले आपकी सैलरी कितनी भी हो, लेकिन पीएफ 15,000 बेसिक सैलरी पर ही कैलकुलेट किया जाता था. अब सरकार ने इसकी लिमिट बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दी है.


किन कर्मचारियों पर पड़ेगा असर?


सरकार के इस नए नियम का असर उन कर्मचारियों पर पड़ेगा, जिनकी सैलरी 15,000 से ज्यादा, लेकिन 25,000 रुपये तक है. इसी के साथ चूंकि सितंबर के महीने को एक ट्रांजिशन फेज के तौर पर देखा जा रहा है इसलिए इस बार पीएफ कटौती का हिसाब-किताब कर्मचारी की पुरानी और नई सदस्यता स्थिति के आधार पर अलग-अलग हो सकती है. EPFO का यह नियम महीने के बीच में बदला है इसलिए 14 दिनों के प्रो-राटा (Prorated) के हिसाब से कंट्रीब्यूशन का हिसाब लगाया जाएगा.


पहला कैलकुलेशन


सरकार के नए नियम के मुताबिक, अब 15,000 से लेकर 25,000 तक की बेसिक सैलरी वाले लोगों का पीएफ (PF) कटना अनिवार्य होगा. मान लीजिए किसी की बेसिक सैलरी 20,000 रुपये है और नए नियमों के मुताबिक, वह कर्मचारी 17 सितंबर से EPFO का सदस्य बना है, तो 1 से 16 सितंबर तक की उसकी सैलरी पर कोई पीएफ कटौती नहीं होगी.


17 से 30 तारीख तक 14 दिनों का उसका आनुपातिक वेतन 20,000 की बेसिक सैलरी के आधार पर 9,333.33 रुपये होगी और इसी रकम में से 12% यानी कि 1,120 रुपये EPF कॉन्ट्रिब्यूशन के तौर पर कर्मचारी की सितंबर की सैलरी से काटा जाएगा.


इस रकम पर एम्पलॉयर EPF कॉन्ट्रिब्यूशन  3.67% यानी करीब 342.53 रुपये बनेगा और EPS में 8.33% यानी 777.47 रुपये डाले जाएंगे. इस तरह EPF और EPS को मिलाकर टोटल 2,240 रुपये कॉन्ट्रिब्यूट किए जाएंगे.


इसके अलावा कंपनी अपनी जेब से सैलरी का 0.50% (यानी 46.67 रुपये) EDLI में देगा, जो एक तरह का मुफ्त सरकारी जीवन बीमा है. इसके लिए कर्मचारी की सैलरी में से कोई पैसा नहीं कटता है. 


दूसरा कैलकुलेशन


दूसरी स्थिति में अगर कोई कर्मचारी पहले से ही भविष्य निधि (EPF) का मेंबर रहा हो और अपनी सैलरी पर पीएफ कटवा रहा हो, लेकिन वह अब तक पेंशन योजना (EPS) का हिस्सा नहीं था.


सरकार के 17 सितंबर से अनिवार्य नियम के मुताबिक अब उसे अनिवार्य रूप से पेंशन योजना (EPS) में शामिल होना पड़ा है. तो 20,000 की बेसिक सैलरी पर 12% के हिसाब से पूरे महीने का उसका EPF कंट्रीब्यूशन 2,400 रुपये बनेंगे.


चूंकि वह पहले से ही पीएफ मेंबर था इसलिए उसकी इन-हैंड सैलरी पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है, लेकिन 17 से लागू हुए नए नियम के बाद अब चूंकि वह कर्मचारी पेंशन में आ गया है इसलिए इन 14 दिनों के लिए कंपनी का 12% योगदान (जो 1,120 बनता था) दो हिस्सों में बंट गया है.


1 से 16 सितंबर के लिए कंपनी का EPF कॉन्ट्रिब्यूशन करीब 1,280 और 17 से 30 सितंबर के लिए करीब 342.53 होगा. वहीं, 17 सितंबर के बाद EPS में  करीब 777.47 रुपये जाएंगे. इस स्थिति में सितंबर का कुल EPF और EPS कॉन्ट्रिब्यूशन 4,800 (कर्मचारी का 2,400 और कंपनी का 1,280 + 342.53 + 777.47= 2,400) का योगदान EPFO को जाता है.


तीसरा कैलकुलेशन


तीसरी स्थिति में ऐसे कर्मचारी शामिल हैं, जो पहले से ही विष्य निधि (EPF) और पेंशन योजना (EPS) दोनों के सदस्य रहे हैं. इनके लिए 1 से 16 सितंबर तक पुरानी 15,000 वेतन सीमा लागू होगी इसलिए नियम के मुताबिक इन 16 दिनों के लिए उनकी सैलरी सिर्फ 8,000 मानी जाएगी.


वहीं, 17 से 30 सितंबर तक नई आनुमानिक बेसिक 20,000 सैलरी के आधार पर 9,333.33 जोड़े जाएंगे. इस तरह से 8,000 और 9,333.33 को मिलाकर 17,333.33 रुपये बनते हैं. इसमें से कर्मचारी का 12% योगदान 2,080 होगा. यानी यह रकम सीधे आपकी सितंबर की सैलरी से कटेगी.


कंपनी भी आपकी सैलरी पर कुल 2,080 ही देगी, लेकिन सरकार के नियम के मुताबिक, ये पैसे को दो अलग-अलग खातों में जमा किए जाएंगे. EPS (पेंशन खाता) में 8.33% के हिसाब से 17,333.33 का 1,443.87 रुपये बनेगा. यह पैसा पेंशन अकाउंट में चला जाएगा और पीएफ अकाउंट में 3.67% के हिसाब से 636.13 रुपये चले जाएंगे.
 



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