प्रदोष व्रत प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान शिव को समर्पित होता है. जब त्रयोदशी गुरुवार को आती है तो इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है. इस बार 8 अक्टूबर को नई दिल्ली में प्रदोष पूजा का समय शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक है.


वहीं पंचांग के अनुसार इस दिन चतुर्दशी रात 10:15 बजे से शुरू होगी और अगले दिन रात 9:35 बजे तक रहेगी. शिवरात्रि की विशेष पूजा निशीथ काल में की जाती है. निशीथ पूजा का समय रात 11:44 बजे से 12:33 बजे तक रहेगा.



गुरुवार से जुड़े होने के कारण इस प्रदोष को गुरु प्रदोष कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और शिव पूजा करने से ज्ञान, सद्बुद्धि, सुख-शांति और जीवन की बाधाओं से मुक्ति की कामना की जाती है.


गुरु प्रदोष का महत्व केवल इच्छा पूर्ति तक सीमित नहीं माना जाता. ये दिन व्यक्ति को संयम, सात्विकता और शिव भक्ति से जोड़ने वाला अवसर भी माना जाता है.



इस बार खास बात यह है कि भक्त शाम के प्रदोष काल में गुरु प्रदोष की पूजा कर सकते हैं और इसके बाद रात में निशीथ काल में मासिक शिवरात्रि की पूजा कर सकते हैं. धार्मिक दृष्टि से यह शिव उपासना के दो अलग-अलग पूजा समयों को एक ही दिन में जोड़ने वाला अवसर है.




  • लोग प्रदोष की शाम की पूजा को ही मासिक शिवरात्रि की पूरी पूजा न मानें. दोनों व्रतों के पूजा काल अलग हैं.

  • गुरु प्रदोष के लिए प्रदोष काल महत्वपूर्ण है, जबकि मासिक शिवरात्रि में निशीथ काल की पूजा का विशेष महत्व है. जो लोग ये दोनों व्रत रखते हैं. 

  • इस दिन जैसा व्रत का संकल्प लें उसे पूरा करें. चाहे वो फलाहार, निर्जला व्रत है. 

  • किसी की निंदा, चुगली, या अपशब्द न कहें. 




  • सुबह स्नान करके दोनों व्रत का संकल्प लें. पूरे दिन सात्विक आहार और संयम रखें.

  • शाम को प्रदोष काल में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, अक्षत और पुष्प अर्पित करें. ॐ नमः शिवाय का जाप करेंं.

  • शिव-पार्वती की पूजा के बाद प्रदोष व्रत कथा पढ़ें.

  • इसके बाद रात में निशीथ काल में दोबारा भगवान शिव की पूजा करें. इसमें कुछ लोग रात्रि के चारों प्रहर में शिव जी का अभिषेक करते हैं. 

  • शिवलिंग का अभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाएं, दीपक जलाएं और शिव मंत्र का जाप करें. अपनी सामर्थ्य के अनुसार रात्रि जागरण भी किया जा सकता है.




  • तारीख: 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार

  • गुरु प्रदोष पूजा: शाम 5:59 बजे से रात 8:27 बजे तक

  • त्रयोदशी समाप्त: रात 10:15 बजे

  • मासिक शिवरात्रि निशीथ पूजा: रात 11:44 बजे से 12:33 बजे तक

  • चतुर्दशी: 8 अक्टूबर रात 10:15 बजे से 9 अक्टूबर रात 9:35 बजे तक


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