एक व्यक्ति ने 12999 रुपए में ब्रांडेड जूते खरीदे, लेकिन सावधानी से पहनने के बावजूद सिर्फ दो महीने में ही जूते की परत छिलने लगी और वे खराब हो गए. जब उसने वारंटी क्लेम की तो कंपनी ने बिना किसी तकनीकी जांच के इसे 'आम टूट-फूट बताकर खारिज कर दिया.


इसके बाद पीड़ित ने तेलंगाना उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया. आयोग ने कंपनी को गलत व्यापार प्रथा और सेवा में कमी का दोषी पाया और ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कंपनी को जूतों की पूरी कीमत 12999 रुपए लौटाने, 5 हजार रुपए मानसिक परेशानी का मुआवजा देने और 3 हजार रुपए कानूनी खर्च के रूप में चुकाने का आदेश दिया.


दरअसल रंगारेडी जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सामने 45 साल के व्यक्ति ने शिकायत दर्ज करवाते हुए बताया कि उन्होंने अक्तूबर साल 2025 में कंपनी से पूरे 12,999 रुपए के जूते खरीदे थे. ग्राहक के मुताबिक, करीब दो महीने के इस्तेमाल के बाद ही जूतों में उसकी ऊपरी परत निकलने लगी और उनमें दूसरी तरीके की खराबी भी नजर आने लग गई थी. ग्राहक का कहना था कि उसने जूतों का बेहद सावधानी से इस्तेमाल किया था. इसके बाद उसने कंपनी से वांरटी के तहत शिकायत की. 

कंपनी ने बताया 'रेगुलर वियर एंड टियर'


कंपनी ने अपनी सफाई देते हुए यह जवाब दिया कि जूतों में हुई खराबी सामान्य इस्तेमाल के चलते हुई है. लेकिन ग्राहक ने कंपनी के वांरटी नियमों का हवाला देते हुए अपनी शिकायत पर दोबारा विचार करने की मांग रखी, लेकिन उसे राहत नहीं मिली.  जिसके चलते उसने उपभोक्ता आयोग का रुख किया. शिकायत में कंपनी पर सेवा में कमी और अनुचित व्यवहार को लेकर आरोप लगाया गया. 

आयोग ने मांगा कंपनी से ठोस आधार  

आयोग ने पूरे मामले कि जांच के चलते यह हवाला दिया कि सिर्फ किसी खराबी को रेगुलर वियर एंड टियर बताना पर्याप्त साबित नहीं होगा. कंपनी इस दावे को साबित करने के लिए कोई भी ठोस सबूत या कोई अन्य सबूत पेश करने में असफल रही. आयोग ने यह भी जाना कि जूतों कि खरीदारी के कुछ समय बाद ही उनमें खराबी नजर आने लग गई थी, जिसके समर्थन में ग्राहक ने कुछ तस्वीरें भी पेश की थीं. 

ग्राहक को वापिस मिले जूतों के पैसें 

आयोग ने फैसले के दौरान कंपनी को जूतों की कीमत  यानी कि पूरे 12,999 रुपए वापिस करने का आदेश दिया. ग्राहक को यह राशी प्राप्त होने के बाद वह जूते कंपनी को लौटाने होंगे. इसके अलावा ग्राहक को हुई मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए 5 हजार तथा मुकदमे के खर्च के तौर पर 3 हजार देने का निर्देश दिया गया. इस तरह ग्राहक को कुल 20,999 रुपयों कि राशि मिलेगी. 

45 दिनों के अंदर करना होगा भुगतान


उपभोक्ता आयोग ने कंपनी को आदेश का पालन करते हुए तय रकम 45 दिनों के भीतर ग्राहक को देने को कहा है.इस फैसले में आयोग ने साफ किया कि वारंटी क्लेम को खारिज करने के लिए केवल सामान्य इस्तेमाल से हुई खराबी का हवाला देना पर्याप्त नहीं हो सकता, खासकर तब जब खरीद के थोड़े समय बाद ही समस्या सामने आई हो और कंपनी के पास अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त तकनीकी सबूत न हों.


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