नई दिल्ली: श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कंपनियों को निर्देश दिया है। उन्हें सुनिश्चित करने को कहा गया है कि ईपीएफओ के तहत 25,000 रुपये की बढ़ी हुई वेतन सीमा लागू होने के बाद कर्मचारियों का कानूनी वेतन कम न हो।
इस कदम का मकसद उन आशंकाओं को दूर करना है कि बढ़ी हुई वेतन सीमा के तहत नियोक्ता का हिस्सा कर्मचारियों की 'कॉस्ट-टू-कंपनी' (CTC) से एडजस्ट किया जा सकता है।
सरकार का नया कदम क्या है?सरकार ने 17 सितंबर को ईपीएफओ के तहत वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया। इसका मकसद यह था कि 1 करोड़ से ज्यादा अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य कवरेज के दायरे में लाया जा सके। साथ ही वर्कफोर्स को और ज्यादा औपचारिक बनाया जा सके।
मंत्रालय ने सुझाव दिया कि नियोक्ता सोशल सिक्योरिटी कॉन्ट्रिब्यूशन में अपने हिस्से को बेहतर ह्यूमन रिसोर्स प्रैक्टिस को बढ़ावा देने, कर्मचारियों की संतुष्टि और उन्हें बनाए रखने के तरीके के तौर पर देखें।
क्या नहीं कर सकती हैं कंपनियां?मंत्रालय ने कहा, 'नियोक्ता के कानूनी योगदान को सिर्फ 'कॉस्ट-टू-कंपनी' (CTC) का हिस्सा बताकर कर्मचारी की कटौती नहीं माना जा सकता।'
साथ ही, नियोक्ताओं को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नियोक्ता का कानूनी योगदान सही ढंग से किया जाए। लागू कानून के उलट कर्मचारियों का कानूनी वेतन कम न हो।
इस बारे में जारी अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (FAQs) में मंत्रालय ने माना कि नियोक्ताओं की लागत में अनुमानित बढ़ोतरी होगी।
ऐसे कम किया जा सकता है बोझमंत्रालय ने कहा, 'नियोक्ता 'प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना' (PMVBRY) के तहत हर अतिरिक्त रोजगार के लिए 3,000 रुपये प्रति माह तक के प्रोत्साहन से इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कुछ हद तक कम कर सकते हैं।' साथ ही, वर्कफोर्स को औपचारिक बनाने से निवेश के ठिकाने के तौर पर भारत की छवि भी बेहतर होती है।
टेक-होम सैलरी पर आशंका को किया दूर'टेक-होम सैलरी' (हाथ में आने वाली सैलरी) में कमी की आशंका पर मंत्रालय ने साफ किया कि वेतन सीमा बढ़ने की वजह से EPF में कर्मचारियों के हिस्से में किसी भी बढ़ोतरी पर लगातार बेहतर ब्याज मिलता है। टैक्स का फायदा होता है। यह गारंटीड पेंशन और फ्री इंश्योरेंस कवरेज की ओर ले जाता है जो जीवनभर की सुरक्षा के लिए छोटा सा समझौता है।
एम्प्लॉयर्स को यह भी निर्देशमंत्रालय ने एम्प्लॉयर्स को निर्देश दिया कि वे प्रभावित कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा तुरंत शुरू करें। अगले पेरोल साइकल का इंतजार न करें।
मंत्रालय ने कहा, 'सबसे जरूरी काम है - पहचान करना, हिसाब लगाना, एनरोल करना, रिपोर्ट करना, रकम जमा करना और मिलान करना।'
साथ ही, यह भी साफ किया गया कि 15,000 रुपये से ज्यादा और 25,000 रुपये से कम सैलरी वाले सभी योग्य कर्मचारियों के लिए 'एम्प्लॉईज पेंशन स्कीम' (EPS) का सदस्य बनना जरूरी होगा।
कर्मचारी का अनिवार्य 12% योगदान पूरी तरह से EPF में जाएगा, जबकि एम्प्लॉयर का 12% योगदान दो हिस्सों में बंटेगा। इसमें से एक हिस्सा 8.33% EPS में जाएगा। बाकी हिस्सा EPF में जाएगा।
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