सुशांत सिंह राजपूर की एक्स मैनेजर रह चुकीं दिशा सालियन के पिता ने गुरुवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के ऑफिस पहुंचे और वहां उन्होंने जांच अधिकारी को एक पेन ड्राइव सौंपी। दिशा सालियन मामले को लेकर वकील नीलेश ओझा ने बड़ा दावा किया है। उनका कहना है कि उन्होंने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एक पेन ड्राइव दी है। इसमें दो कथित चश्मदीद गवाहों के बयान और तीन वीडियो मौजूद हैं।




ओझा के मुताबिक, इन बयानों में समेत कुछ अन्य लोगों की कथित भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मामले में पुलिस के साथ मिलकर कथित तौर पर सबूतों को दबाने या मामले को कवर करने की कोशिश की गई।




पहले ही CBI को एक पत्र के जरिए बताया थाओझा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि उन्होंने इन जानकारियों के बारे में पहले ही CBI को एक पत्र के जरिए बताया था। अब पेन ड्राइव के माध्यम से मामले से जुड़े तीन अहम गवाहों की जानकारी भी जांच एजेंसी को दी गई है। इनमें दो कथित प्रत्यक्षदर्शी शामिल हैं। ओझा का कहना है कि जांच प्रभावित न हो, इसलिए वह फिलहाल पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं करना चाहते।




नावेद मुजावर के बयानों पर भी सवालउन्होंने असलम शेख के कथित कार्यकर्ता नावेद मुजावर के बयानों पर भी सवाल उठाए। ओझा के अनुसार, पुलिस के सामने मुजावर ने जो बयान दिया था और बाद में वीडियो में जो बातें कहीं, उनमें अंतर दिखाई देता है। बता दें कि दिशा की मौत मुंबई के मलाड स्थित रीजेंट गैलेक्सी (या गैलेक्सी रीजेंट) बिल्डिंग की 14वीं मंजिल से नीचे गिरने के कारण हुई थी।




पुलिस को दिए बयान में मुजावर ने खुद को घटनास्थल पर मौजूद बताया थाओझा का दावा है कि पुलिस को दिए बयान में मुजावर ने खुद को घटनास्थल पर मौजूद बताया था। उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि उन्होंने को ऊपर से गिरते हुए देखा। इसी बयान में दिशा के कपड़ों का जिक्र लाल टी-शर्ट और क्रीम रंग की पैंट के रूप में किया गया था। वहीं, ओझा के मुताबिक मुजावर के एक दूसरे वीडियो बयान में घटना के समय और कपड़ों को लेकर अलग जानकारी सामने आती है। उनका कहना है कि इन अंतर की वजह से गवाह के बयान की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।




गिरने का समय रात करीब 1:20 बजे बताया गयाघटनास्थल के CCTV फुटेज को लेकर भी ओझा ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि एक तरफ दिशा के गिरने का समय रात करीब 1:20 बजे बताया गया, जबकि CCTV फुटेज में पुलिस करीब 12:50 बजे ही घटनास्थल पर नजर आती है। ओझा के अनुसार, इस अंतर की वजह से घटना के समय और पूरे घटनाक्रम को लेकर पहले सामने आए बयानों की दोबारा जांच जरूरी हो जाती है।




विरोधाभासों की सच्चाई CBI की जांच के बाद ही सामने आ सकेगीओझा ने कहा कि इन सभी दावों और बयानों में मौजूद विरोधाभासों की सच्चाई CBI की जांच के बाद ही सामने आ सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि मामले से जुड़े कुछ लोगों को कथित तौर पर धमकियां मिलने के कारण चार लोगों के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की गई है। इनमें समीर वानखेड़े, सतीश सालियन, आशुतोष पाठक और खुद नीलेश ओझा का नाम शामिल है। ओझा के मुताबिक, इस संबंध में भी CBI को पत्र दिया गया है।




जांच एजेंसी को संबंधित सबूत सौंप दिए गएओझा ने आगे कहा कि हाईकोर्ट के आदेश में सबूत उपलब्ध कराए जाने के बाद आगे की कार्रवाई की बात कही गई थी। उनका दावा है कि अब जांच एजेंसी को संबंधित सबूत सौंप दिए गए हैं। ऐसे में पेन ड्राइव से जुड़ी औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।




संदिग्ध लोगों की जल्द गिरफ्तारी, जरूरत पड़ने पर लुकआउट नोटिस जारी की मांगउन्होंने जांच के दौरान संदिग्ध लोगों की जल्द गिरफ्तारी, जरूरत पड़ने पर लुकआउट नोटिस जारी करने और अदालत से गिरफ्तारी वारंट लेने की मांग भी की है। हालांकि, पेन ड्राइव में मौजूद सामग्री और गवाहों के बयानों की जांच अब CBI को करनी है। ओझा ने कहा कि वह फिलहाल कुछ अहम जानकारियां सार्वजनिक नहीं करेंगे और जांच एजेंसी को सौंपे गए सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई का इंतजार करेंगे।

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