H-1B Visa Changes : अमेरिका में H-1B वीजा प्रोग्राम 2026 में कई बड़े बदलावों से गुजरा रहा है, जिसकी वजह से उन सभी भारतीयों पर असर पड़ा है, जो इस पर जॉब कर रहे हैं। इन बदलावों को ट्रैक करना कई बार मुश्किल हो जाता है, क्योंकि एक ही साथ कई तरह के चेंज का ऐलान कर दिया जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए हम आज जानेंगे कि H-1B वीजा प्रोग्राम में किस तरह के बदलाव हुए हैं। ये जानकारी अमेरिका में जॉब करने वाले भारतीयों के लिए बेहद जरूरी है।
अमेरिकी कंपनियां हर साल हजारों लोगों को पर हायर करती हैं। यहां पर हर साल 65 हजार H-1B वीजा जारी किए जाते हैं। इसके अलावा 20 हजार वीजा उन लोगों के लिए हैं, जिन्होंने अमेरिका में हायर एजुकेशन हासिल किया है। अमेरिका में जॉब के लिए स्टूडेंट्स भी इस वीजा का इस्तेमाल करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए आइए अब H-1B वीजा से जुड़े हुए बदलावों के बारे में जान लेते हैं।
1. एक्सटेंशन पर 4,000 डॉलर की बढ़ी हुई फीस और अमेंडमेंट पिटीशन पर भी अब 4000 डॉलर की फीस देनी होगी। पहले सिर्फ शुरुआती फाइलिंग और कंपनी बदलने के वक्त ही ये फीस देनी होती थी। इसका असर उन कंपनियों पर पड़ेगा, जहां 50 से ज्यादा कर्मचारी हैं और जिनकी आधी से ज्यादा वर्कफोर्स के पास H-1B स्टेटस है। हालांकि यह आम तौर पर कंपनी की लागत होती है, लेकिन इसका IT और कंसल्टिंग फर्म पर बहुत ज्यादा असर पड़ता है, जिससे कर्मचारी के 6 साल के कार्यकाल के दौरान कुल स्पॉन्सरशिप खर्च बढ़ जाता है।
2. वेतन-आधारित H-1B लॉटरी सिस्टम2027 सीजन के लिए H-1B कैप सिलेक्शन सिस्टम अब के OEWS वेतन स्तरों पर आधारित है। जिस शख्स की सैलरी ज्यादा होगी, उसको लॉटरी में ज्यादा एंट्रीज मिलेगी, जैसे, लेवल I को 1 एंट्री मिलती है, जबकि लेवल IV को 4 एंट्रीज मिलती हैं। कम सैलरी वाले शख्स को लॉटरी से हटाया नहीं जाता, लेकिन उनकी एंट्रीज कम होती हैं। अब जॉब के लिए मिल रही सैलरी, नए आवेदकों के लिए लॉटरी में सफल होने की संभावना तय करने में अहम भूमिका निभा रही है।
3. ज्यादा सख्त जांच और कोई ऑटोमैटिक RFE नहींUSCIS की पॉलिसी में हुए बदलाव से जांच करने वाले अधिकारियों को यह अधिकार फिर से मिल गया है कि अगर जरूरी सबूत न हों, तो वे बिना 'रिक्वेस्ट फॉर एविडेंस' (RFE) या 'नोटिस ऑफ इंटेंट टू डिनाई' (NOID) जारी किए सीधे H-1B याचिकाओं को नामंजूर कर सकते हैं। शुरुआती फाइलिंग बहुत सावधानी से और पूरी होनी चाहिए। अब आवेदक दस्तावेजों या फॉर्म के वर्जन में हुई गलतियों को सुधारने के लिए RFE को पक्के दूसरे मौके के तौर पर नहीं मान सकते।
4. नौकरी बदलने और थर्ड-पार्टी प्लेसमेंट के लिए सावधानियांकंपनी बदलना अभी भी मंजूर है, लेकिन ट्रांसफर की अर्जी देने के बाद और मंजूरी मिलने से पहले के समय (पेंडेंसी पीरियड) में ज्यादा बारीकी से जांच की जाती है। कर्मचारियों को अपने स्टेटस का साफ रिकॉर्ड रखना चाहिए, ट्रांसफर की प्रक्रिया चल रही हो तो विदेश यात्रा से बचना चाहिए, और यह पक्का करना चाहिए कि सभी थर्ड-पार्टी क्लाइंट की जानकारी (जैसे नौकरी की जिम्मेदारियां, सैलरी, काम की जगह) पिटीशन में दी गई जानकारी से पूरी तरह मेल खाती हो।
5. इंटरनेशनल ट्रैवल और सोशल मीडिया की ज्यादा जांच-पड़तालस्टेट डिपार्टमेंट ने H-1B और H-4 वीजा के लिए अप्लाई करने वालों की ऑनलाइन मौजूदगी की जांच का दायरा बढ़ा दिया है। इसके तहत, स्क्रीनिंग के लिए उनके पब्लिक सोशल मीडिया प्रोफाइल की भी जांच की जा सकती है।अमेरिका में काम करने वालों के लिए सलाह ये है कि विदेश यात्रा पर जाने से पहले अपने I-94 की एक्सपायरी डेट और वीजा स्टैम्प की वैलिडिटी जरूर चेक कर लें। साथ ही, जब तक एम्प्लॉयर ट्रांसफर या वीजा एक्सटेंशन की प्रक्रिया चल रही हो, तब तक इंटरनेशनल यात्रा करने से बचें।
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