Vamana Jayanti 2026 Puja After Muhurat: वामन जयंती पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की मुख्य पूजा के लिए दोपहर का अभिजीत मुहूर्त बताया गया था. यह समय निकल जाने के बाद कई श्रद्धालुओं के मन में सवाल है कि क्या अब शाम को पूजा की जा सकती है या अगले वर्ष तक इंतजार करना होगा?


राहत की बात यह है कि आज द्वादशी तिथि रात तक रहेगी. इसलिए दोपहर का विशेष मुहूर्त छूटने के बाद भी वामन देव की पूजा, कथा और मंत्र-जप किया जा सकता है. हालांकि इसे अभिजीत मुहूर्त में होने वाली मुख्य पूजा के समान नहीं माना जाएगा.


आज रात कितने बजे तक है द्वादशी तिथि?


पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि 22 सितंबर की रात 9 बजकर 43 मिनट पर शुरू हुई थी. द्वादशी तिथि का समापन आज यानी 23 सितंबर की रात लगभग 10 बजकर 50 मिनट पर होगा.


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भगवान वामन का प्राकट्य द्वादशी तिथि और अभिजीत मुहूर्त में माना जाता है. इसी कारण मुख्य पूजन के लिए दिल्ली-एनसीआर में सुबह 11 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 37 मिनट तक का समय विशेष माना गया था. अब यह मुहूर्त समाप्त हो चुका है, लेकिन द्वादशी तिथि अभी बाकी है.


क्या शाम को वामन भगवान की पूजा कर सकते हैं?


अभिजीत मुहूर्त निकलने के बाद वामन देव की पूजा निषिद्ध नहीं हो जाती. जिन श्रद्धालुओं से किसी कारण दोपहर में पूजा नहीं हो पाई, वे आज शाम या द्वादशी समाप्त होने से पहले भगवान विष्णु के वामन स्वरूप का सामान्य पूजन कर सकते हैं.


यह अंतर समझना जरूरी है कि अभिजीत मुहूर्त भगवान वामन के प्राकट्य से जुड़ा विशेष समय है. इसके बीत जाने का अर्थ यह नहीं कि बाद में की गई पूजा निष्फल हो जाएगी. व्रत और पूजा में समय के साथ श्रद्धा, शुद्धता और संकल्प का भी महत्व माना गया है.


यदि आपके परिवार में पूजा के लिए किसी विशेष परंपरा या आचार्य के निर्देश का पालन किया जाता है, तो उसी को प्राथमिकता दें.


शाम को किस समय करें वामन पूजा?


श्रद्धालु सूर्यास्त के आसपास अथवा उसके बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं. पूजा द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले, यानी आज रात लगभग 10 बजकर 50 मिनट तक पूरी कर लें.


यह समय सभी शहरों में कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से द्वादशी समाप्त होने का समय जांचना बेहतर रहेगा.


दोपहर का अभिजीत मुहूर्त निकल जाने के बाद किसी नए “विशेष मुहूर्त” का दावा करना उचित नहीं है. शाम की पूजा को द्वादशी तिथि के भीतर किया जाने वाला सामान्य वामन पूजन ही समझें.


मुहूर्त छूट गया है तो इस आसान विधि से करें पूजा


सबसे पहले स्नान करें या हाथ-पैर धोकर साफ वस्त्र पहनें. पूजा स्थान को साफ करके भगवान विष्णु या वामन देव की प्रतिमा अथवा तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद इस क्रम में पूजा कर सकते हैं:


1. हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर पूजा का संकल्प करें.
2. भगवान को पीला चंदन, अक्षत और पीले फूल अर्पित करें.
3. धूप और घी का दीपक जलाएं.
4. फल, मिश्री तथा तुलसी दल से युक्त सात्विक प्रसाद चढ़ाएं.
5. ॐ वामनाय नमः’ या ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 11, 21 या 108 बार जप करें.
6. भगवान वामन और राजा बलि की कथा पढ़ें या सुनें.
7. विष्णु आरती करने के बाद पूजा में हुई भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें.


यदि केवल तस्वीर की पूजा कर रहे हैं तो उस पर दूध या जल न डालें. केवल गंगाजल का हल्का छिड़काव करके चंदन और फूल अर्पित करें.


दही-चावल का भोग लगाना जरूरी है?


वामन जयंती पर दही-चावल और मिश्री अर्पित करने की परंपरा कुछ क्षेत्रों में प्रचलित है. स्थानीय या पारिवारिक परंपरा हो तो बिना नमक के दही-चावल में मिश्री और तुलसी दल रखकर भोग लगाया जा सकता है.


हालांकि दही-चावल को हर श्रद्धालु के लिए अनिवार्य भोग नहीं माना जाना चाहिए. कई परंपराओं में दही, चावल और मिश्री का भोग लगाने के बजाय इन वस्तुओं का दान किया जाता है. घर में जो सात्विक प्रसाद उपलब्ध हो, उसे तुलसी दल के साथ भगवान विष्णु को अर्पित किया जा सकता है.


पूजा के बाद व्रत खोल सकते हैं?


यदि आपने सामान्य फलाहार व्रत रखा है तो पारिवारिक परंपरा के अनुसार शाम की पूजा, कथा और आरती के बाद प्रसाद ग्रहण किया जा सकता है. लेकिन पूर्ण द्वादशी उपवास का संकल्प लेने वाले श्रद्धालु अगले दिन सूर्योदय के बाद स्नान, पूजा और दान करके पारण कर सकते हैं.


वामन जयंती के पारण को लेकर अलग-अलग परंपराएं मिलती हैं. इसलिए सभी श्रद्धालुओं के लिए एक ही नियम लागू करना सही नहीं होगा. स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, नियमित दवा या कमजोरी होने पर कठोर उपवास न करें.


पूजा बिल्कुल न कर पाएं तो क्या करें?


यदि रात 10 बजकर 50 मिनट से पहले विधिवत पूजा करना संभव न हो तो कुछ मिनट शांत होकर भगवान विष्णु का ध्यान करें. ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 11 बार जप करें, दीपक जलाएं और अपनी भूल के लिए क्षमा मांगें.


धार्मिक दृष्टि से मुहूर्त पूजा को विशेष बनाता है, लेकिन मुहूर्त छूट जाने के कारण श्रद्धालु को पूजा छोड़ देने की आवश्यकता नहीं है. आज द्वादशी तिथि समाप्त होने तक श्रद्धापूर्वक किया गया वामन पूजन स्वीकार्य माना जाएगा.


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