नोएडा में मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े मामले में छात्र कार्यकर्ता आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लग गई है. इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के उस निर्देश पर भी रोक लगा दी है, जिसमें गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम के वेतन से आकृति को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया गया था.


सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने डीएम मेधा रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार की याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है. आकृति और दूसरे प्रतिवादियों से जवाब दाखिल करने को कहा गया है. 7 अक्टूबर को मामले की अगली सुनवाई होगी.


HC बेंच ने NSA हिरासत को अवैध बताया 


आकृति चौधरी दिल्ली यूनिवर्सिटी की 24 वर्षीय लॉ स्टूडेंट और एक्टिविस्ट हैं. अप्रैल 2026 में नोएडा के मजदूरों के प्रदर्शन से जुड़े मामलों में उनकी गिरफ्तारी हुई थी. इसके बाद 13 मई को उनके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA लगाया गया. 2 सितंबर को इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन की अध्यक्षता वाली बेंच ने आकृति की NSA हिरासत को अवैध करार दिया.


यूपी सरकार ने क्या दी दलील?


सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार का पक्ष वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने रखा. वहीं, मेधा रूपम के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. आकृति की तरफ से वरिष्ठ वकील कोलिन गोंजाल्विस भी कोर्ट में मौजूद रहे. रोहतगी ने दलील दी कि आकृति चौधरी का नाम हरियाणा के मानेसर में हुए उपद्रव में भी सामने आया था.


रोहतगी ने कोर्ट को यह भी बताया कि आकृति की NSA के तहत हिरासत के मामले में डीएम ने उन रिपोर्टों के आधार पर कार्रवाई की, जो एसएचओ, डीसीपी और पुलिस कमिश्नर के स्तर से होकर उनके पास पहुंची थीं. इस आदेश को सलाहकार बोर्ड, राज्य सरकार और केंद्र सरकार से भी मंजूरी मिली थी. इस तरह जिलाधिकारी इस पूरी प्रक्रिया में केवल एक कड़ी थीं.


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SC का लिखित आदेश आया सामने


सुप्रीम कोर्ट के 2 जजों की बेंच ने सुनवाई के दौरान इस बात को नोट किया कि छात्र कार्यकर्ता की NSA हिरासत का आदेश जारी करने से पहले 5 चरणों की प्रक्रिया का पालन किया गया. इस प्रक्रिया में कई अधिकारियों की भूमिका थी. दोनों पक्षों को सुनने के बाद जजों ने मामले में आदेश पारित करने की बात कही थी. अब उनका लिखित आदेश सामने आया है. 


अपने लिखित आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने खास तौर पर हाई कोर्ट के फैसले के पैराग्राफ 27 से 33 पर रोक की बात कही है. इन पैराग्राफ में हाई कोर्ट ने डीएम के आचरण पर कड़ी टिप्पणियां की थीं. साथ ही, आकृति की हिरासत को अवैध बताते हुए उसे डीएम के वेतन से मुआवजा देने का भी आदेश दिया था.


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