भोपाल: मध्य प्रदेश में नवरात्रि से पहले गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर सियासत फिर तेज हो गई है। सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने कहा कि गरबा महज मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि मां दुर्गा की स्तुति और आशीर्वाद लेने की धार्मिक परंपरा है। मुस्लिमों की गरबा में भागीदारी के सवाल पर उन्होंने कहा कि यदि कोई हिंदू धर्म स्वीकार करता है, तो वह गरबा में आ सकता है।
गरबा को सिर्फ एंटरटेनमेंट न समझेंविश्वास सारंग ने कहा कि को केवल मनोरंजन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, गरबा में मां दुर्गा की मूर्ति या चित्र स्थापित कर उसके आसपास नृत्य किया जाता है और यह जगत जननी की स्तुति का आयोजन है। उन्होंने कहा कि इस धार्मिक आयोजन का उद्देश्य देवी की आराधना और उनका आशीर्वाद प्राप्त करना है।
मुस्लिमों की एंट्री पर क्या बोले सारंग?गरबा पंडालों में मुस्लिमों की एंट्री के सवाल पर सारंग ने कहा कि, यदि कोई व्यक्ति हिंदू धर्म स्वीकार करता है, तो वह गरबा में आ सकता है। उन्होंने अपने बयान में मूर्ति पूजा और धार्मिक आस्था का भी जिक्र किया। सारंग ने सवाल उठाया कि यदि कोई व्यक्ति मूर्ति पूजा को स्वीकार नहीं करता, तो देवी की स्तुति से जुड़े आयोजन में उसकी भागीदारी का क्या औचित्य है।
वंदे मातरम नहीं गाएंगे, मूर्ति पूजा नहीं करते, गरबा में क्यों आना?उन्होंने कहा कि, मुस्लिम कहते हैं हम वंदे मातरम् नहीं गाएंगे, मुस्लिम कहते हैं कि हम मूर्ति पूजा नहीं करते तो फिर गरबा में ही उन्हें क्यों आना है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि, जब मूर्ति पूजा नहीं करते तो गरबा में मां जगत जननी दुर्गा की मूर्ति लगाकर आराधना की जाती है। यदि मुस्लिमों को आना है तो पहले वे हिन्दू धर्म स्वीकार कर लें, फिर आएं।
पहले भी गरबा को लेकर सामने आते रहे हैं बयानमध्य प्रदेश में नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों में गैर-हिंदुओं की भागीदारी को लेकर पहले भी राजनीतिक बयान सामने आते रहे हैं। 2025 में भी प्रदेश में गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं की एंट्री को लेकर बीजेपी नेताओं के बयान चर्चा में रहे थे। इस बार भी नवरात्रि से पहले सारंग के बयान के बाद गरबा आयोजनों के स्वरूप और उनमें प्रवेश को लेकर बहस फिर सामने आ गई है।