सरकार टेक्सटाइल सेक्टर के लिए एक्सपोर्ट बढ़ाने वाली स्कीम 'रिबेट ऑफ स्टेट एंड सेंट्रल टैक्सेज एंड लेवीज' (RoSCTL) की समय-सीमा 30 सितंबर से आगे बढ़ा सकती है.
नाम न बताने की शर्त पर एक अधिकारी के दिए बयान के हवाले से बिजनेस स्टैंडर्ड ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जहां इंडस्ट्री ने इस स्कीम को 16वें फाइनेंस कमीशन की अवधि के साथ मिलाने के लिए इसे पांच साल और बढ़ाने की मांग की है, वहीं इसे कितना बढ़ाया जाए, इस पर आखिरी फैसला फाइनेंस मिनिस्ट्री के डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर (DoE) को लेना है. अधिकारी ने आगे कहा, "हमने DoE से यह भी कहा है कि वे मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए तय 5,000 करोड़ रुपये के बजट को दोगुना कर दें."
RoSCTL के तहत, सरकार टेक्सटाइल एक्सपोर्ट (जिसमें कपड़े, गारमेंट्स और बुने हुए या निटेड आइटम शामिल हैं) पर लगने वाले स्टेट और सेंट्रल टैक्स का रिइंबर्समेंट करती है. यानी कि कपड़ों के उत्पादन के दौरान चाहें वह गारमेंट्स हो या होम टेक्सटाइल, राज्य और केंद्रीय सरकार उस पर कई ऐसे टैक्स लगाते हैं, जो GST रिफंड के दायरे में नहीं आते. RoSCTL स्कीम इन्हीं छिपे हुए टैक्स को रिफंड कर देती है.
स्कीम के तहत बिजली, पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट (VAT), मंडी कर, स्टांप ड्यूटी, और लॉजिस्टिक्स पर लगने वाले टैक्स से छूट मिलती है. टैक्स रिफंड होने के बाद निर्यातकों के लिए उत्पाद सस्ते हो जाते हैं, जिससे वे चीन, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले वैश्विक बाजार में मजबूती से प्रतिस्पर्धा कर पाते हैं. स्कीम का मकसद यह पक्का करना है कि एक्सपोर्ट टैक्स के बगैर हो, जिससे प्रोडक्ट्स की कॉम्पिटिटिवनेस बनी रहे. FY27 के बजट में दिए गए संशोधित अनुमान के मुताबिक, सरकार ने 2025-26 (FY26) में RoSCTL पर 10,010 करोड़ रुपये खर्च किए हैं.
इंडस्ट्री को उम्मीद है कि 30 सितंबर तक इस स्कीम को बढ़ाने और इसके लिए फंड के आवंटन पर आखिरी फैसला हो जाएगा. टेक्सटाइल इंडस्ट्री लंबे समय से RoSCTL स्कीम में निश्चितता और पूर्वानुमान की मांग कर रही है.
स्कीम की समय सीमा बढ़ने से देश के टेक्सटाइल सेक्टर को बूस्ट मिलेगा. टैक्स रिफंड वापस मिलने से निर्यातकों के लिए उत्पादन लागत में 4% से 6% तक की कमी आएगी, इनके पास वर्किंग कैपिटल की कमी नहीं होगी, भारतीय निर्यातक वैश्विक बाजार में कपड़ों की कीमतें में कम रख पाएंगे, जिससे ऑर्डर वॉल्यूम बढ़ेगा. इससे निर्यातक आने वाले फेस्टिव सीजन के लिए विदेशी खरीदारों के साथ सटीक कीमतों पर लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट्स साइन कर सकेंगे.
RoSCTL योजना की समय सीमा बढ़ने से घरेलू बाजारों में तो दीवाली और छठ पर आम जनता के लिए कपड़े सस्ते नहीं होंगे क्योंकि यह स्कीम सिर्फ विदेशों में निर्यात होने वाले कपड़ों के लिए है. हालांकि,अमेरिका, यूरोप और खाड़ी देशों जैसे विदेशी बाजारों में भारतीय कपड़े जरूर सस्ते होंगे और वहां के खरीदारों को इसका सीधा फायदा मिलेगा.
टाटा में सबसे बड़ी कानूनी जंग, आमने-सामने आए देश के दो दिग्गज वकील सिंघवी और साल्वे
Contact to : xlf550402@gmail.com
Copyright © boyuanhulian 2020 - 2023. All Right Reserved.