हमारे देश में अक्सर यह देखा जाता है कि, लोग नौकरी और काम के सिलसिले में अक्सर दूसरे राज्य में चले जाते हैं. जबकि सुविधा को ध्यान में रखते हुए अपनी कार भी साथ ले जाते हैं. क्योंकि, दूसरे राज्य में बिना खुद के गाड़ी की काफी परेशानी होती है. लेकिन दूसरे राज्य में गाड़ी चलाने से पहले कुछ बातों का ध्यान देना बहुत जरूरी होता है क्योंकि, अगर आप किसी दूसरे राज्य की नंबर प्लेट वाली गाड़ी को लंबे समय तक नए राज्य में चला रहे हैं तो आपका भारी-भरकम चालान कट सकता है.


बता दें कि, भारतीय मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अंतरराज्यीय वाहनों के इस्तेमाल को लेकर बेहद स्पष्ट और सख्त नियम बनाए गए हैं. ज्यादातर लोगों को लगता है कि अगर उनके पास गाड़ी के पूरे ओरिजिनल कागजात हैं तो पुलिस उन्हें नहीं रोक सकती लेकिन यह सोच बिल्कुल गलत है. क्योंकि, बिना सही प्रक्रिया और दस्तावेज के दूसरे राज्य में गाड़ी चलाना गैर-कानूनी माना जाता है. तो चलिए समझते हैं कि मोटर वाहन कानून इस बारे में क्या कहता है और आप चालान से कैसे बच सकते हैं.


क्या कहता है नियम?


बता दें कि, केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम के तहत अगर आप किसी दूसरे राज्य में अपनी गाड़ी केवल घूमने या थोड़े समय के काम से ले गए हैं. तो आपको तुरंत चालान का डर नहीं होता. क्योंकि, कानून के मुताबिक आप किसी भी भारतीय राज्य की गाड़ी को दूसरे राज्य में बिना वहां का स्थानीय रजिस्ट्रेशन कराए अधिकतम 12 महीने तक चला सकते हैं.


लेकिन शर्त यह है कि आपके पास यह साबित करने के लिए वैध दस्तावेज होने चाहिए कि गाड़ी उस राज्य में 12 महीने से कम समय से है. इसके लिए टोल टैक्स की रसीद, फ्यूल बिल, ट्रेन या ट्रांसपोर्टर की बिल्टी सुरक्षित रखना जरूरी होता है.



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NOC और री-रजिस्ट्रेशन अनिवार्य


जानकारी दें दे कि, अगर आप नए राज्य में 12 महीने से ज्यादा अपनी कार लेकर रहता चाहते हैं तो आपको मूल राज्य के आरटीओ से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) लेना होता है. इसके बाद इस एनओसी को नए राज्य के लोकल आरटीओ में जमा करके वहां का रोड टैक्स भरना होता है और गाड़ी का नया रजिस्ट्रेशन नंबर प्राप्त करना होता है.


यदि 12 महीने की समय सीमा बीत जाने के बाद भी आपने नए राज्य में री-रजिस्ट्रेशन नहीं कराया है तो चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस आपका 5,000 से लेकर 10,000 रुपये तक का भारी चालान काट सकती है और गाड़ी सीज भी कर सकती है.



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कब कटता है चालान?


अब सबसे बड़ा सवाल आता है कि, कब कटता है चालान? तो बता दें कि, कई मामलों में 12 महीने पूरे होने से पहले भी पुलिस चालान कर देती है. अगर आपके पास गाड़ी का ओरिजिनल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, वैध इंश्योरेंस और पीयूसी सर्टिफिकेट नहीं है. तो पुलिस तुरंत पेनल्टी लगाती है.


वहीं, इसके अलावा अगर आप नए राज्य के स्थायी निवासी बन चुके हैं और फिर भी पुरानी स्टेट का नंबर चला रहे हैं तो पुलिस इसे टैक्स चोरी मानती है. बिना वैध NOC के गाड़ी चलाने पर भी धारा 192 के तहत कार्रवाई की जाती है.


BH नंबर प्लेट है समाधान


आपको यह बता दें कि, अगर आपकी नौकरी ऐसी है जिसमें हर 2-3 साल में अलग-अलग राज्यों में ट्रांसफर होता रहता है तो बार-बार एनओसी लेने और रोड टैक्स भरने के झंझट से बचने के लिए BH सीरीज नंबर प्लेट सबसे सही विकल्प है.


बीएच सीरीज की नंबर प्लेट वाली गाड़ी को भारत के किसी भी राज्य में बिना किसी अतिरिक्त एनओसी, री-रजिस्ट्रेशन या चालान के डर के बिना-झिझक चलाया जा सकता है. इसमें रोड टैक्स भी दो-दो साल के अंतराल पर ऑनलाइन जमा किया जाता है जिससे अंतरराज्यीय यात्रा बेहद आसान और परेशानी मुक्त हो जाती है.


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