नई दिल्ली: PVR INOX में फिल्म देखने गए एक ग्राहक के साथ पेमेंट को लेकर विवाद हो गया। ग्राहक का आरोप था कि थिएटर ने मूवी टिकट और खाने-पीने की चीजों के लिए कैश लेने से मना कर दिया। इसके बाद बड़ा बखेड़ा बन गया। घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बिजनेस सर्विस के पेमेंट के लिए कानूनी रूप से मान्य करेंसी (लीगल टेंडर) को लेने से मना कर सकते हैं।
यह मामला अहमदाबाद के वकील उत्कर्ष दवे से जुड़ा है। उन्होंने बाद में PVR INOX लिमिटेड को कानूनी नोटिस भेजा। 'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, वकील का दावा है कि 13 सितंबर को जब वह पैलेडियम मॉल स्थित सिनेमा कॉम्प्लेक्स गए तो उनके पास UPI से पेमेंट करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं था।
अपने कानूनी नोटिस में दवे ने ग्राहकों के लिए मल्टीप्लेक्स चेन की 'सिर्फ कैशलेस' पॉलिसी पर सवाल उठाए हैं। कानूनी स्पष्टीकरण मांगा है कि उन्हें सिर्फ UPI इस्तेमाल करने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है।
मल्टीप्लेक्स काउंटर पर आखिर हुआ क्या?नोटिस के अनुसार, दवे PVR INOX में फिल्म देखने गए थे। उनसे टिकट के लिए कैश में पेमेंट करने को कहा गया। बाद में जब वह खाना-पीना खरीदना चाहते थे तो काउंटर पर मौजूद स्टाफ ने कैश लेने से मना कर दिया और कहा कि वह सिर्फ UPI स्वीकार करेंगे।
नोटिस में यह भी सवाल उठाया गया है कि क्या PVR INOX ने पॉइंट ऑफ सेल (जहां पेमेंट होता है) पर अपनी कैशलेस पॉलिसी साफ तौर पर दिखाई थी या ग्राहकों को पहले से बताया था।
TOI के अनुसार, नोटिस में कहा गया है, 'किसी ग्राहक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि उसे ऐसी पॉलिसी के बारे में काउंटर पर पहुंचने और कैश देने की कोशिश करने के बाद ही पता चले।'
दवे ने कंपनी से उन लिखित निर्देशों की कॉपी भी मांगी है जो स्टाफ को पेमेंट के तौर पर कैश न लेने के लिए दिए गए थे।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया एक्ट, 1934 के सेक्शन 26(1) का हवाला देकर वकील ने तर्क दिया कि आरबीआई की ओर से जारी नोट कानूनी रूप से मान्य मुद्रा (लीगल टेंडर) हैं। उन्होंने कहा कि ग्राहकों से जुड़े बिजनेस में कैश लेने से पूरी तरह मना करना पारदर्शिता, निष्पक्षता और जानकारी देने (डिस्क्लोजर) पर सवाल खड़े करता है।
इसमें कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के प्रावधानों का भी जिक्र किया गया है ताकि यह सवाल पूछा जा सके कि क्या PVR INOX ने इस आउटलेट पर कभी औपचारिक रूप से सिर्फ कैशलेस पॉलिसी अपनाई है।
क्या कैश पेमेंट स्वीकार करना जरूरी?भारत में आरबीआई की ओर से जारी नोट कानूनी रूप से मान्य मुद्रा (लीगल टेंडर) हैं। हालांकि, जोटवानी एसोसिएट्स के पार्टनर दिनकर शर्मा के अनुसार, कोई प्राइवेट बिजनेस अपने सामान या सर्विस की शर्तें तय करने के लिए आजाद है। बशर्ते वह लागू कानूनों का पालन करे। यह फर्फ उन बिजनेस के लिए खास तौर पर जरूरी है जहां कैश पेमेंट प्रैक्टिकल नहीं हो सकता। मसलन, ऑनलाइन बिजनेस, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म, डिजिटल सर्विस, ऐप-बेस्ड सर्विस और ऑटोमेटेड सिस्टम।
उन्होंने कहा, 'ऐसे मामलों में डिजिटल पेमेंट पर जोर देना बिजनेस के काम करने के तरीके का हिस्सा हो सकता है।'
वह आगे बोले कि कोई फिजिकल बिजनेस भी आम तौर पर 'कैशलेस' पॉलिसी अपना सकता है। सिर्फ UPI, कार्ड या पेमेंट के दूसरे डिजिटल तरीकों को स्वीकार कर सकता है। बशर्ते कैश स्वीकार करने के लिए कोई खास कानूनी या रेगुलेटरी जरूरत न हो।
हालांकि, एक्सपर्ट ने बताया कि भले ही कोई बिजनेस 'कैशलेस' पॉलिसी अपना सकता है और सिर्फ UPI, कार्ड या पेमेंट के दूसरे डिजिटल तरीकों को स्वीकार कर सकता है। लेकिन, इसकी जानकारी ग्राहकों को पहले ही साफ तौर पर दी जानी चाहिए।
जिन ग्राहकों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, उनका क्या?कानूनी नोटिस में उन ग्राहकों के बारे में भी चिंता जताई गई है जिनके पास स्मार्टफोन, UPI एक्सेस या भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है। दवे ने PVR INOX से पूछा है कि ऐसे ग्राहकों के लिए क्या इंतजाम हैं और क्या कैश में पेमेंट करने को तैयार होने के बावजूद उन्हें एंट्री देने से मना किया जा सकता है।
TOI के अनुसार, नोटिस में कहा गया है, 'खास तौर पर PVR INOX को यह बताना होगा कि क्या ऐसे ग्राहकों को कानूनी करेंसी में पेमेंट करने के लिए तैयार और इच्छुक होने के बावजूद सर्विस खरीदने के मौके से वंचित कर दिया जाएगा।'
सात दिन की समय-सीमा तयशिकायत करने वाले वकील ने PVR INOX से सात दिनों के भीतर जवाब मांगा है। चेतावनी दी है कि अगर कंपनी तय समय-सीमा के भीतर जवाब नहीं देती है तो वह कंज्यूमर कमीशन और दूसरे अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं।
नोटिस में PVR INOX की ओर से डिजिटल पेमेंट के विकल्प देने पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई है। इसके बजाय, इसमें कैश स्वीकार करने से इनकार करने पर सवाल उठाया गया है और तर्क दिया गया है कि ग्राहकों को ऐसी किसी भी पाबंदी के बारे में पहले ही जानकारी दी जानी चाहिए। उन्हें पेमेंट के अपने पसंदीदा तरीके के बारे में सोच-समझकर फैसला लेने की इजाजत दी जानी चाहिए।
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