शामली: उत्तर प्रदेश के कैराना से समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने पुरुष अधिकारियों की मानसिकता को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक कार्यक्रम के दौरान वे महिला जनप्रतिनिधियों से पुरुष अधिकारियों के आदेश लेने में झिझक की बात करती दिखीं। उन्होंने खुद का उदाहरण देते हुए कहा कि दिशा की बैठक में मैंने स्वयं इस स्थिति का अनुभव किया है। उन्होंने महिला जनप्रतिनिधि के तौर पर इंदिरा गांधी के दमदार निर्णय क्षमता की भी बात कही। उनसे प्रेरणा लिए जाने का भी जिक्र किया।
इकरा हसन ने क्या कहा?सांसद इकरा हसन ने एक बैंक के कार्यक्रम के दौरान अपने जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (DISHA) बैठक की कहानी सुनाई। उन्होंने कहा कि वहां ज्यादातर अधिकारी पुरुष होते हैं और उनको 'औरत से ऑर्डर' लेना नहीं आता है। अगर उनसे कोई बात कहना होता है तो वे हमसे नजरें नहीं मिलाते हैं। वे हमारे बराबर बैठे अधीनस्थ से बात करते हैं, डायरेक्ट बात नहीं करते हैं। सांसद ने इस प्रकार की स्थिति में बदलाव लाने के लिए प्रयास करने की बात कही।
सांसद ने बैठकों में पुरुष अधिकारियों को लेकर कहा कि वे लोग मेरी नजरों में नजरें नहीं मिलाकर बात नहीं कर सकते। मेरे बराबर में मेरा कोई सब-ऑर्डिनेट अगर है तो उसको देखकर बात करेंगे। मुझे डायरेक्ट बात नहीं कर सकते। ये जो चीजें हैं, बहुत छोटी चीज है, लेकिन इसके बहुत बड़े मायने हैं। इन्हीं चीजों को हमें बदलना है।
इंदिरा गांधी का किया जिक्रइकरा हसन ने कहा कि अधिकारियों की सोच में बदलाव हम कैसे कर सकते हैं, इस पर काम करना होगा। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को इस मौके पर याद किया। उन्होंने कहा कि जब मैं बहुत छोटी थी, मुझे नेतागिरी का शौक नहीं था। हमारा परिवार राजनीति से जुड़ा रहा है, इसलिए थोड़ा इंटरेस्ट था। मैंने तब एक महिला को देखा था, इंदिरा गांधी जी। सबके अपने ओपिनियन हो सकते हैं। उनकी चीज जो सबसे बेहतर थी, वह उनका विजुअल रिप्रेजेंटेशन होता था।
सांसद ने कहा कि जिस जगह पुरुष खुद को देखते हैं, वहां एक महिला इस प्रकार सशक्त तरीके से खुद को पेश करती थी। वह शानदार था। वह अहसास अपने आप में आपको मानसिक तौर पर सशक्त बनाता है। उस इमेज को मैं आज तक अपने दिमाग से नहीं पाई हूं।
महिलाओं को लेकर दिया संदेशसांसद ने महिलाओं को लेकर संदेश दिया कि यह बेहद जरूरी है कि आप और हम मिलकर ऐसी व्यवस्थाएं बनाएं, जिसमें महिलाएं लीड कर रही हों। चाहे वह बैंक हो या फैमिली का मामला हो। अन्य कोई भी सामाजिक प्रोग्राम हो, जब तक हम लोग जो डिजर्व करते हैं, वह क्लेम नहीं करेंगे, उसको मांगने की क्षमता नहीं जुटाएंगे। अपने भीतर उस पर हक का आत्मविश्वास नहीं खोल पाएंगे। उन्होंने महिलाओं को लीड करते समय अपने आप पर भरोसा रखने की बात कही।
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