नई दिल्ली: जाम की समस्या से राहत के लिए दिल्ली में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया जाएगा। दिल्ली की सड़कों का सर्वे कर प्रत्येक रोड पर ट्रैफिक वॉल्यूम डेटा, गाड़ियों के टर्निंग काउंट, आने-जाने में लगने वाले समय, पब्लिक ट्रांसपोर्ट की संख्या और पार्किंग डिमांड के साथ इंटिग्रेट किया जाएगा।
ट्रैफिक को मॉनिटर करने के लिए होगा इस्तेमालइसी डेटा का इस्तेमाल ट्रैफिक सिग्नल को मॉनिटर करने और टाइमिंग फिक्स करने के लिए किया जाएगा। ट्रैफिक जंक्शन पर जिस तरफ गाड़ियों की संख्या अधिक होगी, उस तरफ ही ग्रीन सिग्नल होगा।
पीडब्ल्यूडी अफसरों का क्या है कहनापीडब्ल्यूडी अफसरों के अनुसार, दिल्ली में जितने भी ट्रैफिक जंक्शन हैं, उनमें से अधिकांश ट्रैफिक लाइट एक निश्चित टाइमर पर काम करती है, जो 30 सेकंड से 180 सेकंड तक होता है। लेकिन एआई ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम रियल टाइम में सड़कों पर गाड़ियों की संख्या देखकर सिग्नल को नियंत्रित करता है।
ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए किया जाता है ये कामऐसे ट्रैफिक मैनेजमेंट के लिए सिग्नल पर स्मार्ट कैमरे, सेंसर, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिसिस तकनीकों का उपयोग होता है। दिल्ली की 1440 किमी से अधिक लंबी सड़कों का सर्वे कर डेटा एकत्रित किया जाएगा।
स्टडी के बाद तय होगी सिग्नल की टाइमिंगइसमें सड़क के प्रत्येक 500 मीटर के स्ट्रेच में ट्रैफिक वॉल्यूम, किसी चौक या चौराहे पर टर्निंग मूवमेंट मूवमेंट काउंट, आने-जाने में लगने वाला समय, पब्लिक ट्रांसपोर्ट संचालन, पार्किंग डिमांड और फ्रेट मूवमेंट का आकलन होगा। डेटा का डिजिटल ढांचा तैयार कर स्टडी के आधार पर किसी ट्रैफिक जंक्शन पर सिग्नल की टाइमिंग तय की जाएगी।
डायनामिक सिग्नल टाइमिंग
इसके बाद ट्रैफिक व्यवस्था को और बेहतर करने के लिए तमाम चौराहों और गोल चक्कर को रीडिजाइन किया होगा और फिर जहां जरूरत होगी, वहां सड़कों पर पैदल रोड क्रॉसिंग बनाया जाएगा।
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