जजों, एमिकस क्यूरी और वकीलों के खिलाफ भेजी जा रही गुमनाम शिकायतों को सुप्रीम कोर्ट ने गंभीरता से लिया है. बिल्डर-बैंक गठजोड़ और होम लोन सबवेंशन स्कीम के दुरुपयोग से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ऐसी शिकायतों को दबाव बनाने की कोशिश बताया. चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि ज़रूरत पड़ी तो सीबीआई से जांच करवाई जाएगी कि इन शिकायतों के पीछे कौन है.
'हम मजबूत लोग हैं'
चीफ जस्टिस, जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने कहा, "बहुत ज़्यादा संभावना है कि इन शिकायतों के पीछे बिल्डर हों और शायद कुछ वकील जिन्होंने उन्हें ऐसी गलत सलाह दी हो. लेकिन उन्हें समझना होगा कि हम मजबूत लोग हैं. ऐसी हरकतें हमें पीछे नहीं हटा सकतीं. हमें दबाव में लेने की कोशिश सफल नहीं होगी."
दर्ज हो सकती है एफआईआर
कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी को शिकायतों का एक सेट सौंपते हुए कहा कि वह पता लगवाएं कि इन शिकायतों के पीछे कौन है? अगली सुनवाई पर शिकायतों का एक और सेट दिया जाएगा. कोर्ट ने संकेत दिया कि शिकायतों के पीछे बिल्डर या उनके लिए काम करने वाले वकील पाए गए तो एफआईआर दर्ज कर जांच को उसके तार्किक परिणाम तक पहुंचाया जाएगा.
क्या है मुख्य मामला?
29 अप्रैल 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने बिल्डरों और बैंकों की कथित मिलीभगत से होमबायर्स को हुए नुकसान की जांच सीबीआई को सौंपी थी. कोर्ट ने सीबीआई को 7 प्रारंभिक जांच (PE) दर्ज करने का निर्देश दिया था. इनमें 1 जांच सुपरटेक के प्रोजेक्ट्स को लेकर होनी थी, 5 जांच नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे, गाजियाबाद और गुरुग्राम के दूसरे प्रोजेक्ट्स और 1 जांच दिल्ली-एनसीआर से बाहर के दूसरे बिल्डरों के प्रोजेक्ट्स के लिए थी.
ईएमआई के लिए दबाव का था आरोप
मामले की शुरुआत लगभग 1200 होमबायर्स की शिकायतों से हुई थी. याचिकाकर्ताओं ने बताया था कि बिल्डर की देरी के कारण उन्हें अब तक फ्लैट का कब्जा नहीं मिला, लेकिन बैंक उनसे ईएमआई वसूल रहे हैं. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि सबवेंशन स्कीम में बैंक अधूरे प्रोजेक्ट के लिए भी बिल्डर के खाते में 60 से 80 प्रतिशत तक लोन राशि भेज रहे हैं और बाद में फ्लैट खरीदारों पर लोन की ईएमआई चुकाने का दबाव बना रहे हैं.
कहां तक पहुंची जांच?
अब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया है कि सीबीआई इस मामले में अब तक 50 एफआईआर दर्ज कर चुकी है. इनमें से 18 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है, 17 में चार्जशीट दाखिल की गई है और एक में क्लोजर रिपोर्ट दी गई है. पांच मामलों में बैंक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हुई और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत कार्रवाई की गई है.
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