नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल के एक सुपरिटेंडेंट के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। कोर्ट के आदेश के बावजूद एक कैदी को पैरोल पर रिहा करने में देरी करने के लिए सुपरिटेंडेंट ने जो कमजोर और बेबुनियाद बहाने बनाए, उन्हें कोर्ट ने गंभीरता से लिया है। जस्टिस पुरुशेंद्र के.कौरव ने कहा कि जेल प्रशासन ने कानूनी व्यवस्था का मजाक बनाया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जेल प्रशासन की हरकतों की वजह से देश का एक नागरिक जो 5 साल और 5 महीने तक विचाराधीन कैदी रहा था। संवैधानिक कोर्ट के रिहाई के आदेश के बावजूद जेल में ही बंद रहा।
सुपरिटेंडेंट पवन कुमार को मिला निर्देशकोर्ट ने तिहाड़ जेल के सुपरिटेंडेंट पवन कुमार को निर्देश दिया कि वे बताएं कि उनके खिलाफ कोर्ट की अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए। जज, रेप के दोषी के तौर पर जेल की सज़ा काट रहे अनवर हुसैन की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिनकी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। कोर्ट ने कुमार से सुनवाई की अगली तारीख, 22 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा।
हुसैन ने शुरू में जेल द्वारा अपनी पैरोल अर्जी खारिज किए जाने को चुनौती देते हुए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने हाई कोर्ट में अपनी आपराधिक अपील खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में कानूनी उपायों को अंतिम रूप देने के लिए आठ हफ्ते की पैरोल की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने हुसैन को चार हफ्ते की पैरोल दी थीजुलाई में जारी एक आदेश में, हाईकोर्ट ने हुसैन को चार हफ्ते की पैरोल दी, लेकिन इसके लिए जेल अधिकारियों की तरफ से कुछ शर्तें तय की जानी थीं। लेकिन जेल प्रशासन ने शर्तें तय नहीं कीं, इसलिए इस आदेश के बावजूद उन्हें रिहा नहीं किया गया। इस वजह से उन्हें 30 जुलाई के आदेश को लागू करवाने के लिए दोबारा हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल करनी पड़ी।
हाईकोर्ट ने 11 अगस्त को आदेश में कुछ बदलाव कियानिर्देशों के दूसरे दौर में, हाईकोर्ट ने 11 अगस्त को पहले वाले आदेश में बदलाव किया और उनकी पैरोल पर रिहाई के लिए कुछ खास शर्तें तय कीं, लेकिन जेल अधिकारी अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने हुसैन की पत्नी से कहा कि जब तक उन्हें सीधे कोर्ट से आदेश नहीं मिलता, तब तक वे कोई कार्रवाई नहीं करेंगे; परिवार से मिलने वाले आदेश पर वे काम नहीं करेंगे।
इस इनकार को गंभीरता से लेते हुए, कोर्ट ने कहा कि 11 अगस्त का आदेश डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित एक सार्वजनिक दस्तावेज़ था, जिसकी प्रमाणिकता की आसानी से पुष्टि की जा सकती थी। कोर्ट ने जेल प्रशासन के रुख को कमजोर और अनुचित बताया।
इससे पहले कोर्ट ने जेल अधीक्षक को पेश होने का निर्देश दिया थाइससे पहले कोर्ट ने जेल अधीक्षक को पेश होने और अपने आचरण के बारे में स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया था। इसके जवाब में, कुमार ने कहा कि उनके कार्यों के पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने 11 अगस्त के आदेश का पालन इसलिए नहीं किया क्योंकि वे उस पते की पुष्टि नहीं कर पाए थे जहाँ याचिकाकर्ता को पैरोल पर रहने के दौरान रहना था। उन्होंने कहा कि यह आवश्यकता सामान्य और नियमित थी।
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