Kushgrahini Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या को केवल तिथि परिवर्तन का दिन नहीं, बल्कि पितरों के स्मरण, तर्पण, दान और आत्मशुद्धि का विशेष अवसर माना गया है. खासतौर पर भाद्रपद अमावस्या को कुशग्रहिणी अमावस्या कहा जाता है. इस दिन वर्षभर के धार्मिक और पितृ कर्मों में इस्तेमाल होने वाली कुश घास को ग्रहण करने की परंपरा है.
आखिर क्यों इस दिन ही कुशा तोड़ने की परंपरा है. कुश किन कार्यों में इस्तेमाल की जाती है, इसका धार्मिक महत्व क्या है. कुशग्रहणी अमावस्या 11 सितंबर 2026 को है.
अमावस्या पर क्या-क्या किया जाता है?
भाद्रपद अमावस्या पर ही क्यों तोड़ी जाती है कुश?
मासे नभस्यमावास्या तस्यां दर्भश्च यो मतः।अयातयामास्ते दर्भा विनियोज्याः पुनः पुनः॥
अर्थात नभस्य मास (भाद्रपद) की अमावस्या को जो दर्भ ग्रहण किए जाते हैं, वे बार-बार धार्मिक कर्मों में प्रयोग करने योग्य रहते हैं और उनमें ‘यातयाम’ दोष नहीं माना जाता. यही इस तिथि पर कुश ग्रहण करने के विशेष विधान का सबसे महत्वपूर्ण आधार है.
कैसे हुई कुश की उत्पत्ति
भगवान विष्णु के रोम से कुश और काश घास की उत्पत्ति हुई. इसी कारण कुश को अत्यंत पवित्र माना गया और इसे विष्णु से संबंधित धार्मिक कर्मों में विशेष स्थान मिला.
गणेश स्थापना के समय कलश में क्या रखें? छोटी-सी गलती से अधूरी रह सकती है पूजा
Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.
Contact to : xlf550402@gmail.com
Copyright © boyuanhulian 2020 - 2023. All Right Reserved.