इन दिनों हमारे देश के लगभग सभी पेट्रोल पंपों पर E20 मिलने लगा है. सरकार का मानना है कि, इससे भारत में प्रदुषण कम होगा और देश के अर्थव्यवस्था को भी फायदा मिलेगा. हालांकि, एथेनॉल को लेकर कई भारतीय नागरिक खुश नहीं हैं. क्योंकि, उनका मानना है कि, E20 से उनके गाड़ियों पर बुरा असर पड़ रहा है और माइलेज में भी गिरावट आई है. जबकि कुछ रिपोर्ट्स का मानना है कि, अगर आपकी कार ज्यादा दिन तक खड़ी रहती है तो उसपर भी एथेनॉल का बुरा असर पड़ेगा.
क्योंकि, जब पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिला होता है तो लंबे समय तक गाड़ी खड़ी रहने से ईंधन का रासायनिक संतुलन बिगड़ने लगता है. जो लोग अपनी गाड़ी महीने में एक-दो बार ही निकालते हैं उनके इंजन के अंदर धीरे-धीरे ऐसी खराबी पनपने लगती है जिसका पता सीधा बड़ी रिपेयरिंग बिल आने पर चलता है. आइए समझते हैं कि कम चलने वाली कारों के लिए E20 पेट्रोल क्यों खतरनाक माना जा रहा है और इससे बचने के लिए आपको क्या सावधानियां बरतनी चाहिए.
जानकारी दें दे कि, एथेनॉल की सबसे बड़ी खासियत और खामी यह है कि यह हाइग्रोस्कोपिक होता है. जिसका मतलब है कि, यह हवा से नमी और पानी को बहुत तेजी से सोखता है. जब आपकी कार हफ्ते-दस दिन तक एक ही जगह खड़ी रहती है तो फ्यूल टैंक में मौजूद हवा से नमी निकलकर एथेनॉल के साथ घुल जाती है.
इसके बाद ज्यादा पानी जमने पर पेट्रोल और एथेनॉल अलग-अलग हो जाते हैं. जिसे तकनीकी भाषा में फेज सेपरेशन कहा जाता. पानी और एथेनॉल का यह भारी मिश्रण टैंक के निचले हिस्से में बैठ जाता है. जब आप कई दिनों बाद गाड़ी स्टार्ट करते हैं तो फ्यूल पंप सीधे इस पानी वाले मिश्रण को खींच लेता है जिससे इंजन झटके लेने लगता है और अचानक बंद पड़ जाता है.

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वहीं, पुराने जमाने की कारों या बिना E20 रेडी इंजन वाली गाड़ियों में धातु के फ्यूल टैंक, रबर के होज पाइप और पारंपरिक फ्यूल इंजेक्टर्स का इस्तेमाल होता है. एथेनॉल में मौजूद पानी जब लंबे समय तक पाइपों और टैंक के अंदर रहता है तो वहां तेजी से जंग लगने लगती है.
इसके बाद जंग और रबर के गलने से बने बारीक कण धीरे-धीरे फ्यूल फिल्टर और इंजेक्टर को ब्लॉक कर देते हैं. जिसके बाद गाड़ी स्टार्ट होने में दिक्कत करती है पिकअप गिर जाता है और बाद में पूरा फ्यूल सिस्टम बदलना पड़ जाता है. जिसमें लगभग 15,000 से 40,000 रुपये तक का भारी खर्च आ जाता है.
आपको बता दें कि, अगर आपकी गाड़ी में फेज सेपरेशन हो चुका है और आप फिर भी उसे चला रहे हैं तो स्पार्क प्लग पर पानी और केमिकल जमने से इंजन मिसफायर की समस्या शुरू हो जाएगी. गाड़ी चलते-चलते अचानक झटका खाएगी और ऐसा लगेगा जैसे पेट्रोल खत्म हो गया हो.
जबकि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल अगर काफी पुराना हो जाए तो उसकी ज्वलनशीलता कम हो जाती है. इससे गाड़ी का माइलेज अचानक 20 से 30 फीसदी तक गिर जाता है और कार से कई तरीके की आवाजें आने लगती हैं.
अगर आप अपनी गाड़ी को एथेनॉल से खराब होने से बचाने चाहते हैं तो आप इन स्टेप्स को फॉलो करके अपनी गाड़ी को बचा सकते हैं:

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