रेस्टोरेंट में बैठते ही मेन्यू कार्ड हाथ में आते ही अक्सर लोगों का कन्फ्यूजन शुरू हो जाता है, क्योंकि इतने सारे ऑप्शन देखकर भूख तो बढ़ जाती है, लेकिन क्या ऑर्डर करना है यह तय करना मुश्किल हो जाता है. यही जल्दबाजी अक्सर जरूरत से ज्यादा ऑर्डर करने और बिल बढ़ने की वजह बन जाती है. आइए जानते हैं कुछ आसान टिप्स, जिनकी मदद से मेन्यू देखते ही सही डिश चुनना आसान हो जाएगा.
मेन्यू देखने से पहले खुद से यह पूछना जरूरी है कि असल में कितनी भूख है. अक्सर मेन्यू में लिखी डिशेज के नाम और उनकी तस्वीरें देखकर भूख असल जरूरत से कहीं ज्यादा महसूस होने लगती है, जिससे लोग जरूरत से ज्यादा खाना ऑर्डर कर बैठते हैं. सही मात्रा में ऑर्डर करने से न सिर्फ खाना बर्बाद होने से बचता है, बल्कि बिल भी बजट में रहता है.
कई रेस्टोरेंट अपने मेन्यू में कुछ खास डिशेज को बड़े और दिलचस्तप रीके से हाईलाइट करते हैं, ताकि ग्राहकों का ध्यान उन्हीं की तरफ खिंचे. बेहतर यही है है कि सिर्फ दिखावे में न बहकर, अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से सीधे काम की चीज चुनें.
वेटर अक्सर कोई खास डिश सजेस्ट करते हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वही हमेशा सबसे अच्छा ऑप्शन हो. कई बार यह सिफारिश रेस्टोरेंट के मुनाफे को ध्यान में रखकर भी की जाती है. इसलिए वेटर का सुझाव सुनना ठीक है, लेकिन आखिरी फैसला अपनी पसंद और बजट के हिसाब से ही लें.
रेस्टोरेंट का माहौल जैसे धीमा म्यूजिक, हल्की लाइटिंग और अच्छी खुशबू, ग्राहकों को आराम से बैठने और बार बार कुछ न कुछ ऑर्डर करने कि कोशिश करता है. जितनी देर बैठा जाए उतना ज्यादा खर्च होने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए ट्रेंड में बहकर एक्स्ट्रा ऑर्डर करने से बचें.
अगर मेन्यू बहुत बड़ा और कन्फ्यूजिंग लगे, तो शुरुआत में कोई हल्की स्टार्टर डिश ऑर्डर करना बेहतर रहता है. इससे रेस्टोरेंट के खाने का स्वाद और क्वालिटी का अंदाजा भी लग जाता है, और बाद में मेन कोर्स तय करना आसान हो जाता है.
कई रेस्टोरेंट कॉम्बो ऑफर्स के जरिए ग्राहकों को ज्यादा खाना ऑर्डर करने कि कोशिश करते हैं. ऐसे ऑफर्स में बचत जरूर दिखती है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि वाकई उतना खाना चाहिए भी या नहीं. जरूरत से ज्यादा कॉम्बो लेने की बजाय अपनी असल भूख के हिसाब से ऑर्डर करना समझदारी भरा फैसला होता है.
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