आजकल के युवा अपनी कार को कई तरह से सजाते हैं. कोई शोरूम से खरीदने के बाद उसमें मॉडिफिकेशन करवाता है तो कोई अपनी कार में कई तरह से स्टीकर लगवाते हैं. अगर आप अपनी कार के पिछले शीशे और विंडस्क्रीन पर स्टीकर लगवाने के शौकीन हैं. तो यह खबर आपके लिए ही है. क्योंकि, आज इस खबर में हम आपको बताएंगे कि, कार के शीशे पर किसी भी तरह का स्टीकर लगाना सही है या नियमों का उल्लंघन करना है. 


बता दें कि, मोटर वाहन अधिनियम के नियमों के मुताबिक किसी भी वाहन के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ करना या उसके शीशों की विसिबिल्टी को प्रभावित करना गैरकानूनी है. अक्सर लोग फैशन के चक्कर में बड़े-बड़े स्टिकर चिपका लेते हैं जिससे पीछे या सामने का व्यू ब्लॉक हो जाता है. ट्रैफिक पुलिस ऐसे वाहनों के खिलाफ लगातार चेकिंग अभियान चलाती है और पकड़े जाने पर न सिर्फ स्टिकर उतरवाती है बल्कि जुर्माना भी वसूलती है. चलिए विस्तार से जानतें हैं ऐसे अपराध पर कितने तक का चालान कट सकता है.


क्या कहते हैं नियम?


आपको बता दें कि, ट्रैफिक नियमों के अनुसार कार का फ्रंट और रियर शीशा कम से कम 70% विज़िबल होना चाहिए और साइड की खिड़कियों के कांच 50% विज़िबल होने चाहिए. अगर आप शीशे पर कोई ऐसा बड़ा स्टिकर लगाते हैं जो ड्राइवर के विजन को रोकता है तो यह सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक माना जाता है.


हमारे देश में इसी वजह से शीशों पर डार्क फिल्म लगाने के साथ-साथ बड़े स्टिकर चिपकाने पर भी पूरी तरह बैन है. ट्रैफिक पुलिस मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 52 और धारा 177 के तहत इसे नियमों का उल्लंघन मानती है और पहली बार में ही 500 से 2,000 रुपये तक का चालान काट सकती है.




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फर्जी स्टिकर पर है सख्ती


आपने अपने आस-पास देखा होगा कि, आजकल गाड़ियों पर प्रेस, एडवोकेट, पुलिस, आर्मी या सरकारी विभागों के प्रतीक चिन्ह वाले स्टिकर लगाने का चलन काफी बढ़ गया है. पुलिस प्रशासन ने इस पर बेहद सख्त रुख अपनाया है. क्योंकि कई लोग टोल टैक्स बचाने, पुलिस चेकिंग से बचने या रौला जमाने के लिए फर्जी तरीके से ये स्टिकर लगा लेते हैं.


अगर आप वास्तव में उस पेशे से नहीं जुड़े हैं और आपने अपनी गाड़ी पर ऐसा कोई पदसूचक स्टिकर लगाया है तो पुलिस न केवल गाड़ी का चालान काटेगी बल्कि धोखाधड़ी के आरोप में कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है. कई राज्यों में अब सही पहचान पत्र न दिखाने पर मौके पर ही ऐसे स्टिकर नोचकर हटा दिए जाते हैं.


इन स्टिकर पर पूरी तरह से पाबंदी


जानकारी दें दे कि, भारत के कई राज्यों में गाड़ियों की विंडस्क्रीन और बंपर पर जाति, धर्म या आपत्तिजनक स्लोगन लिखे स्टिकर लगाने पर सख्त पाबंदी है. पुलिस के मुताबिक ऐसे स्टिकर सामाजिक शांति को प्रभावित करते हैं और सड़क पर अनावश्यक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देते हैं.


जिसके चलते अगर आपकी कार के शीशे पर कोई जातिसूचक शब्द या कोई भड़काऊ मैसेज लिखा हुआ पाया जाता है तो मोटर व्हीकल एक्ट के तहत तुरंत 5,000 रुपये तक का भारी-भरकम चालान काटा जा सकता है और गाड़ी जब्त भी हो सकती है.




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कौन से स्टिकर लगाना वैध है?


अब बात करते हैं कि, नियमों के मुताबिक कौन से स्टिकर लगाने पर कोई दिक्कत नहीं है तो आपको बता दें, हर स्टिकर गैरकानूनी नहीं होता सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कुछ स्टिकर कार के शीशे पर लगाना पूरी तरह से जायज है. जिसमें आरटीओ द्वारा जारी हाई-सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट का कलर-कोडेड फ्यूल स्टिकर और फास्टैग का स्टिकर कार की फ्रंट विंडस्क्रीन पर लगाना अनिवार्य नियम है.


इसके अलावा अगर आप किसी निजी सोसाइटी, कॉलेज, या ऑफिस की पार्किंग का वैलिड पास स्टिकर लगाते हैं तो वह भी एक सीमित कोने में वैध माना जाता है. बस ध्यान रहे कि स्टिकर बहुत बड़ा न हो और ड्राइवर की नजर के सामने रुकावट न पैदा करे ताकि आपका सफर सुरक्षित रहे और आप चालान से भी बचे रहें.


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