टेक्नोलॉजी की दुनिया में स्मार्टफोन एक ऐसा डिवाइस बन चुका है जिसकी ज्यादातर लोगों को जरूरत है. इसके अलावा अब एडवांस स्मार्टफोन में कई सारे ऐसे फीचर्स आ चुके हैं जो लोगों के काम को आसान बनाने का काम करते हैं. इतना ही नहीं, हर साल स्मार्टफोन में नई-नई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल हो रहा है. कभी कैमरा बेहतर होता है तो कभी प्रोसेसर और बैटरी में बड़ा बदलाव देखने को मिलता है. अब Dual Chip टेक्नोलॉजी को लेकर चर्चा तेज हो रही है. माना जा रहा है कि ये टेक्नोलॉजी भविष्य के स्मार्टफोन में परफॉर्मेंस, बैटरी और AI फीचर्स को पहले से ज्यादा बेहतर बना सकती है. आइए जानते हैं कि क्या है ये नई टेक्नोलॉजी.
दरअसल, Dual Chip टेक्नोलॉजी में स्मार्टफोन के अंदर दो अलग-अलग चिप्स का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि फोन में दो नॉर्मल प्रोसेसर लगा दिए जाएं. दोनों चिप्स को अलग-अलग काम के लिए डिजाइन किया जाता है. जैसे एक मेन चिप डेली के काम, गेमिंग और ऐप्स को संभाल सकती है जबकि दूसरी चिप AI प्रोसेसिंग, कैमरा प्रोसेसिंग, कनेक्टिविटी या किसी खास काम को संभाल सकती है. इससे मेन प्रोसेसर पर पड़ने वाला लोड कम किया जा सकता है.
आपको बता दें कि आज स्मार्टफोन में एक साथ कई काम होते हैं. गेमिंग, वीडियो एडिटिंग, कैमरा प्रोसेसिंग और AI फीचर्स जैसे काम प्रोसेसर पर काफी प्रेशर डालते हैं. ऐसे में Dual Chip सिस्टम में काम को अलग-अलग चिप्स के बीच बांटा देगा जिससे प्रोसेसर पर कम लोड पड़ेगा.
इसका फायदा ये होगा कि फोन मल्टीटास्किंग के दौरान ज्यादा तेजी से काम करे और भारी ऐप्स चलाते समय भी परफॉर्मेंस स्टेबल बनी रहे. खासतौर पर गेमिंग और हाई-एंड स्मार्टफोन में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है.
Dual Chip टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा फायदा पावर मैनेजमेंट में देखने को मिलता है. हर काम के लिए पावरफुल मेन प्रोसेसर को चलाने के बजाय कम पावर वाली दूसरी चिप नॉर्मल या बैकग्राउंड टास्क संभाल सकती है.
आने वाले समय में स्मार्टफोन में AI की भूमिका लगातार बढ़ने वाली है. फोटो एडिटिंग, वॉयस कमांड, लाइव ट्रांसलेशन, टेक्स्ट समरी और ऑन-डिवाइस AI जैसे फीचर्स के लिए ज्यादा प्रोसेसिंग पावर चाहिए.
Dual Chip डिजाइन में एक चिप को खास तौर पर AI से जुड़े कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इससे कुछ AI प्रोसेसिंग सीधे फोन पर हो सकेगी और हर छोटे काम के लिए क्लाउड सर्वर पर निर्भरता कम होती है.
फिलहाल Dual Chip टेक्नोलॉजी को हर स्मार्टफोन में जरूरी फीचर नहीं माना जा सकता है. दो चिप्स लगाने से डिजाइन, कॉस्ट, सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन और हीट मैनेजमेंट जैसी चुनौतियां भी बढ़ने लगी हैं
इसलिए शुरुआत में इसका इस्तेमाल प्रीमियम और फ्लैगशिप स्मार्टफोन में ज्यादा देखने को मिलता है. अगर कंपनियां लागत और पावर मैनेजमेंट की चुनौतियों को हल कर लेती हैं तो भविष्य में ये टेक्नोलॉजी मिड-रेंज फोन तक भी पहुंच सकती है.
Dual Chip टेक्नोलॉजी सिर्फ दो चिप्स लगाने का नाम नहीं है बल्कि स्मार्टफोन के अलग-अलग कामों को ज्यादा बेहतर तरीके से बांटने की दिशा में एक कदम है. बेहतर परफॉर्मेंस, कम बैटरी खपत और ज्यादा पावरफुल AI ताकत इसे भविष्य के स्मार्टफोन के लिए जरूरी टेक्नोलॉजी बना सकती हैं. हालांकि इसका असली फायदा तभी सामने आएगा, जब हार्डवेयर के साथ सॉफ्टवेयर भी इन दोनों चिप्स के बीच काम को सही तरीके से बांट सके.
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