Fridge Cooling System : गर्मी हो या सर्दी, फ्रिज हमारे किचन में लगातार अपना काम करता रहता है. कभी इसमें ठंडी बोतलें रखी जाती हैं, तो कभी सब्जियां, दूध और बचा हुआ खाना, लेकिन फ्रिज हर समय कूलिंग नहीं करता है.  वह कुछ देर चलता है, फिर खुद बंद हो जाता है और जरूरत पड़ने पर दोबारा शुरू भी हो जाता है. ऐसे में ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है कि आखिर ऐसा कैसे होता है. फ्रिज के अंदर ऐसा कौन-सा सिस्टम लगा है, जो लगातार तापमान पर नजर रखता है और तय करता है कि कब कूलिंग करनी है और कब उसे रोक देना है. तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि फ्रिज को कैसे पता चलता है कि कब ठंडा करना बंद करना है और इसके अंदर कौन सा सिस्टम लगा है. 


फ्रिज को कैसे पता चलता है कि कब ठंडा करना बंद करना है?


फ्रिज के अंदर लगा थर्मोस्टेट तापमान पर लगातार नजर रखता है और इसी के आधार पर तय करता है कि कूलिंग कब बंद या शुरू करनी है. यह लगातार अंदर के तापमान को मॉनिटर करता है. जब फ्रिज के अंदर तापमान तय स्तर तक पहुंच जाता है, तो थर्मोस्टेट कंप्रेसर को बंद कर देता है, जिससे कूलिंग रुक जाती है. वहीं, जब दरवाजा खुलने, गर्म सामान रखने या दूसरी वजहों से अंदर का तापमान बढ़ने लगता है, तो थर्मोस्टेट कंप्रेसर को दोबारा चालू कर देता है. इसके बाद रेफ्रिजरेंट कूलिंग सिस्टम में घूमता है और अंदर की गर्मी को बाहर निकालकर फ्रिज को फिर से ठंडा करता है. 
 
कैसे शुरू होती है कूलिंग?


फ्रिज के कूलिंग सिस्टम का मुख्य हिस्सा कंप्रेसर होता है. यह रेफ्रिजरेंट गैस को खींचकर उसे कंप्रेस करता है, जिससे उसका दबाव और तापमान बढ़ जाता है. इसके बाद गर्म रेफ्रिजरेंट गैस बाहर लगे कंडेंसर कॉइल में जाती है. यहां वह आसपास की हवा के संपर्क में आकर अपनी गर्मी छोड़ती है और धीरे-धीरे तरल में बदल जाती है. 


अंदर की गर्मी को बाहर कैसे किया जाता है?


इसके बाद तरल रेफ्रिजरेंट कम दबाव वाले हिस्से यानी इवैपोरेटर कॉइल में पहुंचता है. यहां यह फिर से गैस में बदलने लगता है. इस प्रक्रिया के दौरान रेफ्रिजरेंट फ्रिज के अंदर मौजूद गर्मी को सोखता है. इससे फ्रिज के अंदर की हवा और उसमें रखा सामान ठंडा होने लगता है. 


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ठंडक पूरी होते ही रुक जाता है कंप्रेसर


जब फ्रिज के अंदर तापमान थर्मोस्टेट की तय सीमा तक पहुंच जाता है, तो सेंसर इसकी जानकारी देता है और कंप्रेसर बंद हो जाता है. इसके बाद जब दरवाजा बार-बार खुलने, गर्म सामान रखने या दूसरी वजहों से अंदर का तापमान बढ़ता है, तो थर्मोस्टेट फिर कंप्रेसर को चालू कर देता है. इसके साथ ही रेफ्रिजरेशन साइकल दोबारा शुरू हो जाता है. 


फ्रिज का कूलिंग साइकल ऐसे चलता है


रेफ्रिजरेंट पहले कंप्रेसर में कंप्रेस होता है, फिर कंडेंसर कॉइल में जाकर गर्मी बाहर छोड़ता है और तरल बन जाता है. इसके बाद यह इवैपोरेटर कॉइल में पहुंचता है, जहां गर्मी को सोखकर फिर गैस में बदल जाता है. यह गैस वापस कंप्रेसर में पहुंचती है और यही प्रक्रिया बार-बार दोहराई जाती है. इसी बंद सिस्टम की वजह से फ्रिज लगातार अंदर की ठंडक बनाए रखता है. 


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