Digital India: आज अगर आप किसी दुकान पर 10 रुपए की चाय पीएं, 50 रुपए की सब्जी लें या फिर मोहल्ले की किराना दुकान से सामान खरीदें तो कैश निकालने की जरूरत ही नहीं पड़ती है. दुकान के बाहर लगा एक छोटा-सा क्यूआर कोड स्कैन किया और पेमेंट हो गया. देश में डिजिटल पेमेंट की इस आदत को बढ़ाने में बड़े मॉल और कंपनियों से ज्यादा भूमिका छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों, चाय वालों और किराना कारोबारियों की रही है.
अब सरकार की एक स्टडी में भी इसका आंकड़ा सामने आया है. रिपोर्ट के मुताबिक सर्वे में शामिल 94 फीसदी छोटे दुकानदारों ने यूपीआई अपनाया हुआ है.
कितने दुकानदार यूपीआई से जुड़े?
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग ने इस साल फरवरी में रिपोर्ट जारी किया था. ये स्टडी रुपे डेबिट कार्ड और कम वैल्यू वाले भीम- यूपीआई पर्सन-टू-मर्चेंट ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए चलाई गई सरकारी प्रोत्साहन योजना के असर को समझने के लिए की गई थी. इसमें 15 राज्यों के 10,378 लोगों को शामिल किया गया. इनमें 6,167 यूजर्स, 2,199 मर्चेंट और 2,012 सर्विस प्रोवाइडर्स थे.
रिपोर्ट में दिखा कि सर्वे में शामिल छोटे कारोबारियों में 94 फीसदी ने यूपीआई अपनाया है. यानी यूपीआई सिर्फ शहरों के दुकानदारों तक नहीं रह गया है. चाय की छोटी दुकान से लेकर सड़क किनारे सब्जी बेचने वाले तक इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.
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क्या फायदा हुआ?
सरकारी स्टडी के मुताबिक डिजिटल पेमेंट अपनाने वाले 72 फीसदी दुकानदार काफी खुश हैं. उन्होंने इसे तेज ट्रांजैक्शन, रिकॉर्ड रखने में आसानी और कारोबार चलाने में सुविधा बताया है. वहीं 57 फीसदी दुकानदारों ने डिजिटल पेमेंट अपनाने के बाद बिक्री बढ़ने की बात कही है. हालांकि रिपोर्ट ने ये भी साफ किया है कि बिक्री में हुई इस बढ़ोतरी को सिर्फ यूपीआई की वजह से नहीं माना जा सकता है. छोटे कारोबारियों के हर लेन-देन का डिजिटल रिकॉर्ड बन जाता है. ग्राहक के पास कैश न हो तो भी बिक्री रुकती नहीं है और दुकानदार को खुले पैसे रखने की परेशानी भी कम होती है.
कौन सी स्कीम से मिली मदद?
छोटे दुकानदारों तक यूपीआई पहुंचाने में सिर्फ क्यूआर कोड की सुविधा ही काम नहीं आई है. सरकार ने FY 2021-22 में डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन योजना शुरू की थी, जिसे FY 2024-25 तक जारी रखा गया था. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह के बोनस ने दुकानदारों और पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े बैंकों के लिए लागत की बाधा कम करने, नए मर्चेंट जोड़ने और डिजिटल पेमेंट को लेकर भरोसा बढ़ाने में मदद की.
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कितने मिलियन हुए क्यूआर?
यूपीआई की पहुंच बढ़ने के साथ इसका इंफ्रास्ट्रक्चर भी तेजी से बढ़ा है. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक प्रोत्साहन योजना के दौरान यूपीआई क्यूआर डेवलपमेंट्स 93 मिलियन से बढ़कर करीब 658 मिलियन हो गए. वहीं यूपीआई पर काम करने वाले बैंकों की संख्या मार्च 2021 के 216 से बढ़कर मार्च 2025 में 661 हो गई. थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर्स की संख्या भी 16 से बढ़कर 38 हो गई.
7 करोड़ मर्चेंट्स को डिजिटल पेमेंट
यूपीआई के बढ़ते इस्तेमाल का अंदाजा एक दूसरे आंकड़े से भी लगाया जा सकता है. एनपीसीआई और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक साउंडबॉक्स और इंटरऑपरेबल क्यूआर कोड्स ने करीब 6.5 करोड़ से 7 करोड़ मर्चेंट्स को डिजिटल पेमेंट से जोड़ने में मदद की है. इनमें बड़ी संख्या सड़क किनारे सामान बेचने वालों, चाय की दुकानों और मोहल्ले की किराना दुकानों की है. यानी यूपीआई की कहानी सिर्फ फोनपे, गूगल पे या पेटीएम जैसे ऐप्स की कहानी नहीं है. इसके पीछे वो छोटा दुकानदार भी है जिसने अपनी दुकान पर क्यूआर कोड लगाकर डिजिटल पेमेंट को रोजमर्रा की खरीदारी का हिस्सा बना दिया.
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