
चेन्नई, 5 जुलाई . पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने Sunday को तमिलनाडु Government से कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना के खिलाफ साझा रणनीति बनाने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की. उन्होंने दावा किया कि कावेरी बेसिन के किसान इस विवाद के समाधान के लिए नए ट्रिब्यूनल के गठन के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर चुके हैं.
अंबुमणि रामदास ने आरोप लगाया कि कर्नाटक मेकेदातु परियोजना को लेकर तेजी से आगे बढ़ रहा है, जबकि तमिलनाडु Government उतनी मजबूती से इसका विरोध नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि इससे खासकर कावेरी डेल्टा के किसानों में गहरी चिंता है और उन्हें आशंका है कि यदि तत्काल प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राज्य अपने जल अधिकारों को खो सकता है.
पीएमके प्रमुख ने बताया कि उन्होंने 1 से 4 जुलाई के बीच बिलिगुंडलु से पूम्पुहार तक चार दिवसीय जनजागरूकता अभियान चलाया. इस दौरान उन्होंने कावेरी बेसिन के विभिन्न इलाकों का दौरा कर किसानों से मुलाकात की और प्रस्तावित मेकेदातु बांध के संभावित प्रभावों पर चर्चा की.
उन्होंने कहा कि अभियान के दौरान किसानों ने स्पष्ट रूप से बताया कि उन्हें कर्नाटक के इस आश्वासन पर भरोसा नहीं है कि बांध बनने के बाद भी तमिलनाडु के हिस्से के कावेरी जल पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उनका कहना था कि कर्नाटक पहले भी जल बंटवारे से जुड़े अपने दायित्वों का पालन नहीं करता रहा है, इसलिए किसान उसकी नई गारंटी पर विश्वास नहीं कर रहे हैं.
अंबुमणि रामदास ने तमिलनाडु विधानसभा द्वारा मेकेदातु मुद्दे पर नए ट्रिब्यूनल के गठन की मांग वाले प्रस्ताव का भी विरोध किया. उन्होंने दावा किया कि किसान इस प्रस्ताव के खिलाफ हैं, क्योंकि उनका मानना है कि नए ट्रिब्यूनल के जरिए कानूनी प्रक्रिया दोबारा शुरू होने से तमिलनाडु के बजाय कर्नाटक की स्थिति मजबूत हो सकती है.
उन्होंने कहा कि भले ही तमिलनाडु के Chief Minister विजय किसानों के हितों की रक्षा के प्रति ईमानदार हों, लेकिन किसानों का मानना है कि मेकेदातु मुद्दे पर उन्हें गलत सलाह दी जा रही है.
पीएमके अध्यक्ष ने राज्य Government की आलोचना करते हुए कहा कि विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने के अलावा Government ने कर्नाटक की इस परियोजना को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है.
उन्होंने तमिलनाडु Government से तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाकर कावेरी डेल्टा के किसानों की आशंकाओं को दूर करने और मेकेदातु परियोजना को रोकने के लिए व्यापक रणनीति तैयार करने की अपील की.
अंबुमणि रामदास ने दावा किया कि उनके जागरूकता अभियान में करीब पांच लाख किसानों और आम लोगों ने भाग लिया और सभी ने मेकेदातु परियोजना को हर हाल में रोकने की मांग की. उनका यह दौरा होगेनक्कल, पेन्नागरम, धर्मपुरी, सलेम, मेट्टूर, भवानी, इरोड, तिरुप्पुर, करूर, तिरुचिरापल्ली, कल्लनई (ग्रैंड एनीकट), तंजावुर, कुंभकोणम और मयिलादुथुरै सहित कई क्षेत्रों से होकर गुजरा.
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डीएससी
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