तमिलनाडु से 50 बांग्लादेशी नागरिकों के एक ग्रुप को उनके देश वापस भेजने की प्रक्रिया के तहत ट्रेन से पश्चिम बंगाल भेजा गया है. पुलिस ने शनिवार को बताया कि इन लोगों में 44 पुरुष और छह महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें पहले सलेम जिले के अत्तूर तालुक ऑफिस कॉम्प्लेक्स में बने स्पेशल डिटेंशन कैंप में रखा गया था. देश से बाहर भेजने के आधिकारिक आदेशों के बाद 3 जुलाई को कड़ी सुरक्षा के बीच इस ग्रुप को तीन वैन में सड़क मार्ग से पहले तिरुचिरापल्ली ले जाया गया. फिर तिरुचिरापल्ली पहुंचने पर उन्हें हावड़ा एक्सप्रेस के एक खास कोच में बंगाल भेजा गया.
ट्रेन के सफर में सलेम आर्म्ड रिजर्व के डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (DSP) शक्तिवेल की अगुवाई में 40 सदस्यों वाली हथियारों से लैस पुलिस टीम उनके साथ है. अधिकारियों ने बताया कि तमिलनाडु पुलिस पश्चिम बंगाल में हरिदासपुर लैंड बॉर्डर पर इन नागरिकों को औपचारिक रूप से बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) को सौंपेगी. इसके बाद BSF बांग्लादेशी अधिकारियों को उन्हें सौंपने की अंतिम प्रक्रिया पूरी करेगी.
अत्तूर स्पेशल कैंप, जिसे बिना वैलिड दस्तावेजों वाले प्रवासियों की आवाजाही को अस्थायी रूप से रोकने के लिए बनाया गया था, उसमें अभी भी 130 से ज्यादा विदेशी नागरिक रह रहे हैं, जिनके मामले लंबित हैं या जो जमानत पर बाहर हैं.
अभी हाल ही में मार्च महीने में सलेम के अत्तूर जेल में स्थित विशेष शरणार्थी शिविर में बंद 33 बांग्लादेशी नागरिकों को उनकी सजा पूरी करने के बाद उनके देश वापस भेजा गया था. इस ग्रुप में 25 पुरुष, चार महिलाएं और चार बच्चे शामिल थे. इनमें से अधिकांश को साल 2025 में चेन्नई के मंगडू और डिंडीगुल के कल्लिमंडयम में पुलिस द्वारा तमिलनाडु में वैलिड दस्तावेजों के बिना रहने या जाली दस्तावेज रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. हालांकि अपनी-अपनी सजा पूरी करने के बाद उन्हें वापस उनके देश भेज दिया गया था. इन लोगों को पहले तिरुची जंक्शन रेलवे स्टेशन ले जाया गया था, जहां से उन्हें ट्रेन के एक खास डिब्बे में बिठाकर पश्चिम बंगाल ले जाया गया था.
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