श्रीनगर, 28 जून . जम्मू-कश्मीर के उपGovernor मनोज सिन्हा ने Sunday को उत्तर कश्मीर स्थित बालटाल बेस कैंप का दौरा कर आगामी श्री अमरनाथ जी यात्रा-2026 की तैयारियों की समीक्षा की. इस दौरान उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर बुनियादी ढांचे, सुरक्षा व्यवस्था और तीर्थयात्रियों के लिए की गई तैयारियों का जायजा लिया.


उपGovernor मनोज सिन्हा ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि यात्रा शुरू होने से पहले सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, ताकि भगवान शिव के श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और सुव्यवस्थित वातावरण मिल सके.


उन्होंने कहा, “मेरी प्राथमिकता है कि प्रत्येक श्रद्धालु इस आध्यात्मिक यात्रा का सुखद और संतोषजनक अनुभव लेकर लौटे. यह यात्रा आस्था और सामूहिक आनंद का प्रतीक है और व्यवस्थाएं भी उसी भावना को दर्शानी चाहिए.”


बालटाल बेस कैंप में पत्रकारों से बातचीत करते हुए एलजी ने कहा कि पिछले कई महीनों से श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड, जम्मू-कश्मीर प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और अन्य संबंधित विभागों के समन्वित प्रयासों से यात्रा की तैयारियां की जा रही हैं. उन्होंने विश्वास जताया कि इस वर्ष की यात्रा पहले से अधिक सुरक्षित और बेहतर प्रबंधन वाली होगी.


इस अवसर पर मनोज सिन्हा ने ग्रामीण स्वच्छता निदेशालय की ‘शुभम-शिवम’ मुहिम का शुभारंभ किया. उन्होंने इसे स्वच्छ, टिकाऊ और ‘जीरो-लैंडफिल’ अमरनाथ यात्रा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. साथ ही यात्रा की नई वेबसाइट, आधिकारिक थीम सॉन्ग, लोगो और शुभंकर (मैस्कॉट) का भी अनावरण किया.


उन्होंने कहा कि इस अभियान की असली ताकत स्वच्छता कर्मी और कर्मयोगी स्वयंसेवक हैं, जो बेस कैंप और दोनों यात्रा मार्गों को साफ-सुथरा रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे. उन्होंने उनके समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यही लोग पर्यावरण संरक्षण और यात्रा की आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने के वास्तविक नायक हैं.


गौरतलब है कि श्री अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को श्रावण पूर्णिमा और रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी. समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र गुफा जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में कश्मीर हिमालय क्षेत्र में स्थित है.


श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम मार्ग या छोटे बालटाल मार्ग से यात्रा कर सकते हैं. पहलगाम मार्ग से गुफा तक पहुंचने में लगभग चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग से जाने वाले श्रद्धालु दर्शन कर उसी दिन वापस बेस कैंप लौट आते हैं.


गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला हिम शिवलिंग चंद्रमा की कलाओं के अनुसार घटता-बढ़ता है, जिसे श्रद्धालु भगवान शिव का दिव्य स्वरूप मानते हैं.


प्रशासन ने इस वर्ष भी दोनों बेस कैंप से आगे गुफा तक के पूरे मार्ग को ‘नो-फ्लाई जोन’ घोषित किया है. इसके चलते यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं होगी.



डीएससी

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