New Delhi, 28 जून . गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) एक जुलाई को अपने 10वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है. यह देश की आजादी के बाद का अब तक का सबसे बड़ा टैक्स सुधार है. इसे व्यवसायों के बीच एक सरल और भरोसेमंद डिजिटल इकोसिस्टम के तौर पर लगभग हर जगह स्वीकार किया जा चुका है. यह जानकारी ताजा डेलॉइट सर्वे में दी गई.


रिपोर्ट के अनुसार, अगले चरण यानी GST 2.0 में डिजिटलाइजेशन से आगे बढ़कर एक इंटेलिजेंट, प्रेडिक्टिव और इंटीग्रेटेड फ्रेमवर्क अपनाया जाएगा. इसमें बिजनेस एआई-आधारित अनुपालन, डेटा के जरिए विवादों में कमी और करदाताओं के लिए एक सहज और एकीकृत अनुभव की उम्मीद है.


रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय कॉरपोरेट जगत का GST पर विश्वास बढ़ रहा है. 99 प्रतिशत से अधिक कारोबारियों ने GST के साथ अपने अनुभव को सकारात्मक या तटस्थ बताया है. वहीं, नकारात्मक धारणा लगभग शून्य पर पहुंच गई है, जो 2025 में 5 प्रतिशत और 2022 में 10 प्रतिशत थी.


इस बढ़ते भरोसे के पीछे कई महत्वपूर्ण सुधार हैं, जिनमें कर अनुपालन का डिजिटलीकरण (69 प्रतिशत), कर प्रक्रियाओं का स्वचालन(54 प्रतिशत), ई-इनवॉइसिंग एवं ई-वे बिल प्रणाली का स्थिर होना (48 प्रतिशत) प्रमुख हैं. इसके अलावा, पारदर्शिता, एकरूपता और कारोबार करने में बढ़ी आसानी ने भी GST व्यवस्था पर उद्योग जगत का विश्वास मजबूत किया है.


रिपोर्ट के अनुसार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) तेजी से तिमाही GST रिटर्न व्यवस्था को अपना रहे हैं. इसका प्रमाण यह है कि इस व्यवस्था के प्रति सकारात्मक प्रतिक्रिया 2023 में 12 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 67 प्रतिशत हो गई है.


इससे स्पष्ट होता है कि प्रौद्योगिकी-आधारित कर प्रशासन अब बेहद महत्वपूर्ण हो गया है. कंपनियां अधिक सटीकता, तेजी और प्रक्रियाओं में पूर्वानुमान सुनिश्चित करने के लिए लगातार डिजिटल प्रणालियों पर अधिक निर्भर होते जा रहे हैं.


रिपोर्ट में कहा गया है कि GST दरों के युक्तिकरणका सबसे अधिक प्रभाव उपभोक्ता क्षेत्र (64 प्रतिशत), लाइफ साइंसेज और हेल्थकेयर क्षेत्र (58 प्रतिशत) में देखा गया है. हालांकि, यह प्रभाव मुख्य रूप से संरचनात्मक है और बहुत कम ऐसे क्षेत्र हैं, जहां खपत में कोई बदलाव नहीं देखा गया. कुल मिलाकर, विभिन्न क्षेत्रों की अपनी-अपनी विशेषताओं के बावजूद, सभी की अपेक्षा एक अधिक सरल, स्मार्ट और इंटेलिजेंट GST प्रणाली की है.


GST ने केंद्र और राज्यों के 17 विभिन्न करों और 13 उपकरों की जगह एक एकीकृत अप्रत्यक्ष कर प्रणाली लागू की. इसका उद्देश्य पूरे India में एक समान राष्ट्रीय बाजार तैयार करना और दोहरे कराधान को समाप्त करना था.


केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, GST 2.0 के तहत विभिन्न वस्तुओं और सेवाओं पर कर दरों में की गई कटौती ने India की आर्थिक वृद्धि को नई गति दी है. इससे परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ी है, कारोबार करना आसान हुआ है और कर प्रशासन अधिक सरल बना है.


उन्होंने कहा, “कर दरों के युक्तिकरण और विभिन्न उपभोक्ता वस्तुओं पर GST दरों में कमी से परिवारों को प्रत्यक्ष बचत हुई है. इससे उनके पास खर्च करने योग्य आय बढ़ी है, जिससे मांग को बढ़ावा मिला है.”


GST लागू होने के समय 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत की कई कर स्लैब थीं, जबकि विलासिता और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक वस्तुओं पर अतिरिक्त सेस लगाया जाता था. इसके बाद Government ने 22 सितंबर 2025 से संशोधित दो-स्तरीय GST ढांचा लागू किया. नए ढांचे के तहत अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं को 5 प्रतिशत या 18 प्रतिशत की दो प्रमुख कर श्रेणियों में रखा गया है, जबकि 40 प्रतिशत की अलग दर केवल विलासिता और ‘सिन गुड्स’ (जैसे अत्यधिक शक्कर वाले पेय पदार्थ) पर लागू है.


पिछले नौ वर्षों में GST के तहत पंजीकृत करदाताओं की संख्या 66.5 लाख से बढ़कर करीब 1.6 करोड़ हो गई है. यह देश की अर्थव्यवस्था में बढ़ते औपचारिककरण का संकेत है.


वहीं, औसत मासिक GST संग्रह भी लगभग दोगुना होकर 2017-18 के 89,700 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 1.85 लाख करोड़ रुपए हो गया है.



एबीएस

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