आज हम बवासीर बिमारी के बारे में बताने वाले है, और साथ ही इसके इलाज के बारे में आप पीले बटन को दबाकर हमे फॉलो जरुर करे.



आपको बताना चाहेगे कि इसको ख़ूँनी और बादी बवासीर दोनों नामो से जाना जाता है,आपको बताना चाहेंगे कि बिमारी पीढ़ी दर पीढ़ी पाया होता है मतलब कि अनुवांशिकता इस रोग का एक कारण भी यह हो सकता है, जिन व्यक्तियों को अपने व्यवसाय के कारण से घंटों खड़े रहना पड़ता हो, उदाहरण के तोर पर, बस कंडक्टर, ट्रॉफिक पुलिस, पोस्टमैन या जिन्हें भारी वजन उठाने पड़ते हों,- जैसे कुली, मजदूर, भारोत्तलक वगैरह, उनमें इस बीमारी से पीड़ित होने की संभावना ज्यादा होती है.

पहली अवस्था में कुछ घर पर कुछ उपायों से रोग की परेशानीयो से पर बहूत हद तक कण्ट्रोल किया जा सकता है, बता दे, शुरू में कब्ज को दूर कर मल त्याग को सामान्य और नियमित करना जरुरी है, इसके लिये हरी सब्जियों एवं फलों का ज्यादा से ज्यादा में सेवन करें। तेल की चीजें, मिर्च-मसालों से परहेज करे, रात में सोते वक्त एक गिलास पानी में इसबगोल की भूसी के दो चम्मच डालकर पीने से भी फायदा मिलता है, गुदा के अन्दर रात के सोने से पूर्व और सुबह मल त्याग के पूर्व दवायुक्त क्रीम का प्रवेश भी मल निकास को सही करता है। गुदा के बाहर लटके और सूजे हुए मस्सों पर ग्लिसरीन और मैग्नेशियम सल्फेट के मिलाकर के लेप लगाकर पट्टी बांधने से भी फायदा मिलता है, मलत्याग के बाद गुदा के आसपास की अच्छी तरह सफाई और गर्म पानी का सेंक करना भी लाभदायक होता है, अगर सारे तरीको के बाद भी फायदा नही होता है तो डॉक्टर के पास सलाह ले|





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