पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 33 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। इसका प्रभाव टेलीकॉम उद्योग पर भी पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मोबाइल टावरों के संचालन में आने वाले कुल खर्च का 40 प्रतिशत हिस्सा केवल पेट्रोल और बिजली पर खर्च होता है। ऐसे में ईंधन की कीमतों में वृद्धि से टेलीकॉम कंपनियों का खर्च सैकड़ों करोड़ रुपये बढ़ सकता है।






पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के कारण, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में पेट्रोल की कीमत 107 रुपये तक पहुंच गई है। यह वृद्धि लोगों के लिए चिंता का कारण बन रही है। लेकिन यह वृद्धि केवल यहीं तक सीमित नहीं है। मोबाइल रिचार्ज योजनाओं पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। एक मोबाइल टावर के संचालन के लिए बिजली और ईंधन का खर्च उसके कुल संचालन खर्च का लगभग 40% होता है। इसका अर्थ है कि अब मोबाइल टावरों के संचालन में अधिक खर्च आएगा, जिससे कंपनियां टैरिफ बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं।



टेलीकॉम कंपनियों का बढ़ता खर्च

टेलीकॉम टॉवर के संचालन के लिए कंपनियों को बिजली और ईंधन पर लगभग 40% खर्च करना पड़ता है। इस स्थिति में, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से टॉवर के संचालन का खर्च भी बढ़ेगा। कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च को अपने ग्राहकों से वसूलने का प्रयास कर सकती हैं।




रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि बड़े टेलीकॉम ऑपरेटरों को मोबाइल टॉवरों के संचालन के लिए डीजल पर हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये अधिक खर्च करने पड़ सकते हैं। 5G टावरों को अधिक बिजली और डीजल की आवश्यकता होती है, जिससे टेलीकॉम कंपनियों के लिए संचालन और महंगा हो जाएगा।



टैरिफ बढ़ोतरी की संभावना

वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आ रही समस्याओं के कारण टेलीकॉम कंपनियों को अपने अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में भी बढ़ते खर्च का सामना करना पड़ेगा। पहले से ही, टेलीकॉम कंपनियां भारतीय बाजार में टैरिफ बढ़ाने की योजना बना रही थीं, लेकिन इसमें थोड़ा समय लगने की उम्मीद थी। अब, यह जल्द ही होने की संभावना है।



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