हिमाचली खबर: केला एक ऐसा फल है जो साल के बारह महीनों में मिलता है। कई पोषक तत्वों से भरपूर केला, सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है। लेकिन इन दिनों मार्केट में धड़ल्ले से केमिकल वाले केले बेचे जा रहे हैं। ये केले बाहर से दिखने में पीले और पके हुए लगते हैं लेकिन जब छिलका निकाल कर देखो तो अंदर से एकदम कड़क और कच्चे होते हैं। दरअसल, बाहर से पका और अंदर से कच्चा केला अक्सर कैल्शियम कार्बाइड केमिकल से पकाया जाता है जो सेहत के लिए भी नुकसानदायक होता है। ऐसे में चलिए जानते हैं इस तरह से पकाए गए केले की पहचान खरीदने से पहले कैसे करें?
डंठल से करें पहचान: केला खरीदते समय सबसे पहले उसका डंठल चेक करें। जो केला नेचुरली पका होता है उसका डंठल भूरा या काला होता है। वहीँ जो केला केमिकल से पकाया जाता है उसका डंठल एकदम हरा और ताज़ा दिखता है
हल्के धब्बे वाले केले: जो केला प्राकृतिक रूप से पका होता है उसके छिलके पर हल्का काला या भूरा छोटा छोटा धब्बा होता है। वहीं, जो केला केमिकल से पकाया जाता है वह एकदम पीला और चिकना दिखता है और उसपर कोई भी धब्बे नज़र नहीं आते हैं।
कलर का एक समान न होना: अगर केला केमिकल से पकाया गया है तो उसका कलर अनइवेन हो सकता है। जैसे अगर केला बीच में पीला है लेकिन ऊपरनीचे का रंग हरा है तो उसे न खरीदें। यह केमिकल वाला केला हो सकता है।
खुशबू से पहचानें: प्राकृतिक रूप से पके केले में अक्सर मीठी खुशबू आती है, जबकि केमिकल वाले केले में कोई खुशबू नहीं आती है। साथ ही प्राकृतिक रूप से पका केला हल्का नरम होता है और केमिकल वाला बाहर से कड़ा हो सकता है।
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