भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने डिजिटल वॉलेट और प्रीपेड कार्ड के भविष्य को सुरक्षित और आसान बनाने के लिए एक नया ड्राफ्ट फ्रेमवर्क पेश किया है। इस पहल का खास उद्देश्य डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा को मजबूत करना, शिकायतों के निपटारे को आसान बनाना और लंबे समय में PPI सेक्टर के विकास को बढ़ावा देना है। RBI ने इस ड्राफ्ट पर 22 मई 2026 तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।
कौन जारी कर सकेगा PPI और क्या हैं शर्तें?RBI के नए नियमों के मुताबिक वे सभी बैंक जो डेबिट कार्ड जारी करने के लिए अधिकृत हैं, वे विभाग को सूचना देकर PPI जारी कर सकते हैं। साथ ही वहीं, गैर-बैंकिंग संस्थाओं को इसके लिए RBI से विशेष अनुमति लेनी होगी। आपको बता दें कि ऐसी संस्थाओं के पास कम से कम ₹5 करोड़ का नेटवर्थ होना अनिवार्य है, जिसे तीसरे वित्तीय वर्ष के अंत तक बढ़ाकर ₹15 करोड़ करना होगा।
वॉलेट बैलेंस और लोडिंग की नई सीमाएंरिजर्व बैंक ने अलग-अलग श्रेणियों के लिए सीमा तय करने का सुझाव दिया है:
जनरल पर्पस PPI: इसमें अधिकतम ₹2 लाख तक रखे जा सकेंगे, जबकि कैश लोडिंग की सीमा ₹10,000 प्रति माह तय की गई है।
गिफ्ट और ट्रांजिट कार्ड: गिफ्ट कार्ड की सीमा ₹10,000 और मेट्रो/बस जैसे ट्रांजिट कार्ड की सीमा ₹3,000 प्रस्तावित है।
NRIs: विदेशी पर्यटक भी पासपोर्ट वेरिफिकेशन के बाद वॉलेट का उपयोग कर सकेंगे, जिसकी महीने के खर्च की सीमा ₹5 लाख होगी।
ग्राहकों को राहतग्राहकों की सुरक्षा के लिए RBI ने साफ किया है कि ट्रांजैक्शन फेल होने या कैंसिल होने पर रिफंड तुरंत वॉलेट में वापस आएगा, चाहे उससे लिमिट ही क्यों न पार हो जाए। साथ ही, PPI एजेंट अब ग्राहकों से कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं वसूल सकेंगे। बता दें कि कंपनियों को सभी नियम और चार्ज हिंदी, अंग्रेजी और स्थानीय भाषा में साफ तौर से बताने होंगे ताकि धोखाधड़ी की गुंजाइश न रहे।
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