मुंबई, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। महाराष्ट्र सरकार ने सोमवार को राज्य के शहरी इलाकों के गर्मी जोखिम वाले जिलों में बाहरी अनौपचारिक श्रमिकों की सुरक्षा के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) जारी कीं।


राज्य के आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन की ओर से जारी एडवाइजरी के मुताबिक, गर्मी की चेतावनियों के दौरान बाहरी काम के घंटों को बदलकर सुबह 6 बजे से 11 बजे तक और शाम 4 बजे से रात 8 बजे तक, यानी ठंडे समय में करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक अनिवार्य रूप से आराम के ब्रेक देने और विशेष रूप से निर्माण, औद्योगिक और वेंडिंग क्षेत्रों में काम की शिफ्टों को निर्धारित करने का निर्देश दिया गया है।


इसके अलावा, आधिकारिक जिला या शहरी स्थानीय निकाय परिपत्र जारी करना आवश्यक होगा, जिनमें विशेष रूप से निर्माण, औद्योगिक और वेंडिंग क्षेत्रों में कार्य-समय में बदलाव को अनिवार्य किया जाए।


महिलाओं के लिए कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए रोशनी, परिवहन और सुरक्षात्मक सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी। इस एसओपी की आवश्यकता इसलिए पड़ी, क्योंकि महाराष्ट्र भारत के उन शीर्ष 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल है, जो गर्मी के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील हैं।


राज्य हीट एक्शन प्लान के मुताबिक, विदर्भ, मराठवाड़ा और खानदेश क्षेत्रों के 15 जिलों को अत्यधिक गर्मी के प्रति बहुत ज्यादा संवेदनशील माना गया है। इन जिलों में लातूर, अमरावती, यवतमाल, वाशिम, अकोला, बुलढाणा, नागपुर, वर्धा, चंद्रपुर, गोंदिया, भंडारा, जलगांव, नंदुरबार, धुले और नांदेड़ शामिल हैं।


यह एसओपी उन सभी नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों पर लागू होता है, जो उच्च जोखिम वाले शहरी क्षेत्रों में कार्यरत हैं।


एसओपी के मुताबिक, बाजारों, चौराहों, ट्रैफ़िक जंक्शनों, ट्रांजिट हब और वेंडिंग क्षेत्रों सहित प्रमुख अनौपचारिक कार्य स्थलों पर पानी के बूथ लगाना जरूरी होगा, ताकि स्पष्ट साइनेज और नियमित रूप से पानी भरने की व्यवस्था के साथ सभी को पानी उपलब्ध हो सके।


प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, वार्ड कार्यालयों और एनजीओ के माध्यम से ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ओआरएस) और इलेक्ट्रोलाइट सैशे का वितरण किया जाना होगा।


दोपहर के समय पार्क और बगीचे खुले और लोगों के लिए उपलब्ध रहने चाहिए। साथ ही, वेंडिंग क्षेत्रों, मजदूर चौकों, मजदूरों के लिए तय जगहों और ट्रैफिक जंक्शनों पर गर्मी से बचाव के लिए अस्थायी शेड लगाए जाएंगे।


जहां तक मेडिकल तैयारियों और निगरानी की बात है, तो प्राइमरी हेल्थ सेंटर और शहरी हेल्थ सेंटर में ओआरएस, आईवी फ्लूइड्स और गर्मी से होने वाली बीमारियों के इलाज के लिए किट का स्टॉक रखना होगा।


आशा कार्यकर्ताओं और वार्ड हेल्थ वर्करों को गर्मी से जुड़ी बीमारियों के बारे में ट्रेनिंग देने की जरूरत है। ज्यादा जोखिम वाले इलाकों में 108 एम्बुलेंस पहले से तैनात करनी होगी और ज्यादा जोखिम वाले दिनों में रिस्पॉन्स टाइम पर नजर रखनी होगी।


एसओपी में शहरी प्लानिंग और डिजाइन में छायादार सार्वजनिक जगहों को बढ़ावा देने, पेड़ लगाने, रिफ्लेक्टिव सतहों और मिस्टिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया गया है। इसके अलावा, ज्यादा काम वाले इलाकों को पक्की छाया, ठंडी छतों और पानी की सुविधा के साथ अपग्रेड करने, और मालिकों व बाजार संघों को कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर लगाने के लिए प्रोत्साहन देने की बात भी कही गई है।


इस बीच, राज्य सरकार नागपुर में आपदा प्रबंधन से जुड़ी ट्रेनिंग और रिसर्च के लिए एक सेंटर बनाएगी, जिस पर 184 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस सेंटर का काम बहुत ज्यादा गर्मी की स्थितियों और टिकाऊ कूलिंग से जुड़ी ट्रेनिंग देना और रिसर्च करना होगा।


--आईएएनएस


एएसएच/एबीएम

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