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देश में ऑनलाइन फ्रॉड को रोकने के लिए रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने कुछ बड़े कदम उठाए हैं। सेंट्रल बैंक ने 5 सिक्योर पॉइंट्स पर काम शुरू कर दिया है। बेशक, यह सिर्फ़ एक प्रपोज़ल है। इस नए नियम की वजह से अब पेमेंट में समय लगेगा। सामने वाले को पेमेंट मिलने में 1 घंटा लगेगा। यह नियम सिक्योरिटी के लिए लागू किया जा रहा है। इसलिए, कई लोग कह रहे हैं कि यह नियम अच्छा है। जबकि कुछ ने इस बदलाव को नज़रअंदाज़ कर दिया है।


नियम की ज़रूरत क्यों है?


पहले से समझ लीजिए कि इस नियम की ज़रूरत क्यों पड़ी। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में डिजिटल फ्रॉड के 28 लाख मामले सामने आए। आम नागरिकों के अकाउंट से करीब 22,931 रुपये चोरी हो गए। इस चोरी की रकम ने बैंक का ध्यान खींचा है। चोरों ने 10 हजार रुपये से ज़्यादा की रकम पर यह लूट की है। इसलिए, एक तरफ डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के साथ-साथ सेंट्रल बैंक सिक्योरिटी को लेकर भी अलर्ट हो गया है।


क्या है वह मास्टर प्लान?


अब नए फीचर्स के मुताबिक, अगर यूजर को लगता है कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो वह एक क्लिक से तुरंत डिजिटल पेमेंट मोड्स को बंद कर सकता है। इसके लिए उसे एक घंटा लग सकता है। UPI, नेट बैंकिंग और कार्ड्स को एक क्लिक से सिक्योर किया जा सकता है।


अब 10 हजार रुपये से ज़्यादा के पेमेंट में एक घंटा लग सकता है। मान लीजिए अगर 12 हजार रुपये का पेमेंट किया जाता है, तो रकम अकाउंट से डायवर्ट हो जाएगी। लेकिन यह तुरंत दूसरे बैंक अकाउंट में क्रेडिट नहीं होगी। इसके लिए एक घंटा लगता था। अगर यह अकाउंट बोगस है या साइबर बदमाशों का खेल है, तो इस पर ध्यान दिया जाएगा और मेहनत की कमाई बच जाएगी।


RBI ने साइबर बदमाशों के अकाउंट पकड़ने के लिए एक बड़ा कैंपेन चलाया है। अगर किसी के अकाउंट में बहुत ज़्यादा पैसे आने लगेंगे, तो उस अकाउंट पर कड़ी नज़र रखी जाएगी। साथ ही, अकाउंट होल्डर की भी जांच की जाएगी। अगर अकाउंट होल्डर का eKYC मैच नहीं करता है, तो ऐसे अकाउंट बंद कर दिए जाएंगे और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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