News India Live, Digital Desk: चिलचिलाती गर्मी और लू के थपेड़ों से राहत पाने के लिए सदियों से मिट्टी का घड़ा यानी 'देसी फ्रिज' भारतीयों की पहली पसंद रहा है। फ्रिज का पानी भले ही गला तर कर दे, लेकिन जो सुकून और स्वास्थ्य लाभ मिट्टी के घड़े के पानी में मिलता है, उसका कोई मुकाबला नहीं। हालांकि, बाजार में जब हम घड़ा खरीदने जाते हैं, तो वहां लाल और काले, दो तरह के मिट्टी के बर्तन दिखाई देते हैं। अक्सर लोग असमंजस में रहते हैं कि पानी को लंबे समय तक ठंडा रखने और सेहत के लिहाज से कौन सा रंग बेहतर है। आइए जानते हैं क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स और क्या है इनके पीछे का विज्ञान।लाल घड़ा: प्राकृतिक और पारंपरिक विकल्पलाल रंग के घड़े सबसे ज्यादा प्रचलित हैं। इन्हें साधारण मिट्टी से बनाया जाता है और प्राकृतिक रूप से पकाया जाता है। लाल मिट्टी में आयरन ऑक्साइड की मात्रा अधिक होती है, जो पानी को प्राकृतिक रूप से फिल्टर करने में मदद करती है। वास्तु और आयुर्वेद के अनुसार, लाल घड़ा घर में सकारात्मकता लाता है और इसका पानी पीने से शरीर का पीएच (pH) लेवल संतुलित रहता है। यदि घड़े की बनावट अच्छी है और उसमें सूक्ष्म छिद्र (Pores) सही मात्रा में हैं, तो यह पानी को बहुत ही सौम्य तरीके से ठंडा करता है।काला घड़ा: क्यों माना जाता है अधिक असरदार?काले रंग के घड़े बनाने की तकनीक थोड़ी अलग होती है। इन्हें पकते समय धुआं दिया जाता है या खास तरह की काली मिट्टी का उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो काले घड़े में वाष्पीकरण (Evaporation) की प्रक्रिया लाल घड़े के मुकाबले थोड़ी तेज हो सकती है, जिससे पानी जल्दी और अधिक ठंडा होता है। जो लोग बहुत ज्यादा ठंडा पानी पीना पसंद करते हैं, उनके लिए काला घड़ा एक बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।ठंडक का असली राज: रंग नहीं, बनावट है जरूरीविशेषज्ञों के अनुसार, पानी कितना ठंडा होगा यह केवल रंग पर नहीं बल्कि घड़े के 'पोरस' होने यानी उसमें मौजूद बारीक छेदों पर निर्भर करता है। जब इन छेदों से पानी बाहर रिसता है और बाहर की हवा के संपर्क में आकर भाप बनता है, तो घड़े के अंदर का तापमान गिर जाता है। घड़ा खरीदते समय उसे हल्का सा ठोक कर देखें; अगर धातु जैसी खनक वाली आवाज आए, तो समझ लें कि घड़ा अच्छी तरह पका हुआ है और पानी को सही ढंग से ठंडा करेगा।सेहत के लिए कौन सा है वरदान?मिट्टी चाहे लाल हो या काली, दोनों ही क्षारीय (Alkaline) प्रकृति की होती हैं। हमारा शरीर एसिडिक होता है, इसलिए घड़े का पानी शरीर के एसिड को बेअसर कर पाचन को बेहतर बनाता है। फ्रिज के पानी की तरह यह गले को नुकसान नहीं पहुंचाता और मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है। गर्मियों में लू से बचने के लिए मिट्टी के घड़े का पानी रामबाण माना जाता है। बस ध्यान रहे कि हर 3-4 महीने में घड़ा बदल देना चाहिए क्योंकि समय के साथ इसके सूक्ष्म छिद्र बंद हो जाते हैं।घड़े के पानी को ज्यादा ठंडा रखने के टिप्सघड़े को हमेशा किसी हवादार स्थान पर रखें।घड़े के नीचे बालू (रेत) की एक परत बिछाकर उसे गीला रखें, इससे पानी बर्फ जैसा ठंडा रहेगा।घड़े के चारों ओर एक गीला सूती कपड़ा लपेट कर रखने से भी वाष्पीकरण की प्रक्रिया तेज होती है और पानी की ठंडक बनी रहती है।