नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के ऊर्जा बाजार पर गहराता नजर आ रहा है। तेल आपूर्ति बाधित होने और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में तेज उछाल के बीच देश में वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर, विमान ईंधन (एटीएफ) और प्रीमियम ईंधन के दामों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसका सीधा असर परिवहन, विमानन और सेवा क्षेत्र की लागत पर पड़ने के साथ महंगाई के नए दबाव के रूप में सामने आ रहा है।
तेल विपणन कंपनियों के अनुसार 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत दिल्ली में 195.50 रुपये बढ़कर 2,078.50 रुपये हो गई है। जनवरी से अब तक यह पांचवीं बढ़ोतरी है, जिससे कुल वृद्धि करीब 498 रुपये तक पहुंच चुकी है। अन्य महानगरों में भी कीमतों में तेजी बनी हुई है-कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में भी दो सौ रुपये तक की वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा गया है, जिससे आम उपभोक्ताओं को सीमित राहत मिली है।
सबसे बड़ा झटका विमानन क्षेत्र को लगा है, जहां एटीएफ की कीमतों में अभूतपूर्व उछाल आया है। राजधानी दिल्ली में एटीएफ का भाव बढ़कर 2.07 लाख रुपये प्रति किलोलीटर से अधिक हो गया है, जो पिछले स्तर के मुकाबले करीब दोगुने से भी ज्यादा है। देश के अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी तरह की वृद्धि दर्ज की गई है। इस बढ़ोतरी से एयरलाइंस के परिचालन खर्च में भारी इजाफा तय है, जिसका असर जल्द ही हवाई किराए में बढ़ोतरी के रूप में दिख सकता है।
इसी के साथ प्रीमियम पेट्रोल और डीजल के दामों में भी वृद्धि की गई है। 100 ऑक्टेन पेट्रोल की कीमत में दो अंकों की बढ़ोतरी हुई है, जबकि उच्च गुणवत्ता वाले डीजल के दाम भी ऊपर गए हैं। हालांकि इन ईंधनों का उपयोग सीमित वर्ग तक ही रहता है, फिर भी यह संकेत देता है कि ऊर्जा बाजार में दबाव लगातार बढ़ रहा है।
राहत का पहलू यह है कि रेगुलर पेट्रोल और डीजल की कीमतों को अभी स्थिर बनाए रखा गया है। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ न डालने की रणनीति अपनाई है। इसके बावजूद तेल कंपनियों पर घाटे का दबाव बढ़ रहा है, जिससे भविष्य में कीमतों पर पुनर्विचार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है और वैश्विक बाजार में कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं। भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि यहां ऊर्जा की बड़ी जरूरतें बाहरी स्रोतों पर निर्भर करती हैं। वर्तमान परिदृश्य में वाणिज्यिक गैस महंगी होने से होटल, रेस्टोरेंट और कैटरिंग सेक्टर की लागत बढ़ेगी, जिसका असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
वहीं विमान ईंधन में उछाल से हवाई यात्रा महंगी होने की आशंका है। यदि हालात लंबे समय तक बने रहते हैं, तो परिवहन लागत बढ़ने से अन्य वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। सरकार और तेल कंपनियां फिलहाल हालात पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन वैश्विक स्तर पर तनाव कम नहीं हुआ तो आने वाले समय में महंगाई का दबाव और व्यापक हो सकता है।
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