अक्सर लोग पेट दर्द, बार-बार टॉयलेट जाना या पाचन से जुड़ी समस्याओं को हल्का समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन कई बार यही छोटे-छोटे लक्षण किसी गंभीर बीमारी की ओर इशारा कर रहे होते हैं. इंग्लैंड के ईस्टबोर्न में रहने वाले 45 वर्षीय सैस प्रसाद के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. शुरुआत में उन्हें लगा कि यह कोई सामान्य फूड पॉइजनिंग या पेट खराब होने की समस्या है, लेकिन धीरे-धीरे यह परेशानी इतनी बढ़ गई कि उनकी पूरी जिंदगी प्रभावित होने लगी.
करीब 15 साल पहले एक रात अचानक उनके पेट में तेज दर्द उठा. उन्होंने सोचा कि यह थोड़ी देर में ठीक हो जाएगा, लेकिन दर्द कम होने के बजाय लगातार बना रहा. शुरुआती 10 दिनों तक हालत में कोई सुधार नहीं हुआ, बल्कि स्थिति और गंभीर होती गई. सैस बताते हैं कि वे पूरे दिन घर पर ही रहते थे और हर 5 से 10 मिनट में बाथरूम जाने की जरूरत पड़ती थी. यह समस्या इतनी बढ़ गई थी कि उनका सामान्य जीवन लगभग रुक सा गया था.
ऐसी कौन सी हुई बीमारी?अपने उस दौर को याद करते हुए सैस कहते हैं कि मैं एक दिन में 100 बार से भी ज्यादा टॉयलेट जाता था. लगातार दर्द और ब्लीडिंग की वजह से मेरा शरीर बेहद कमजोर हो गया था. मैं खाना खाने से भी डरने लगा था. इस बीमारी का असर उनके शरीर पर साफ दिखाई देने लगा था. दो साल के अंदर उनका लगभग 15 किलो वजन कम हो गया, चेहरा पीला पड़ गया और वे खुद को बेहद थका हुआ महसूस करने लगे. स्थिति इतनी खराब हो गई कि वे घर से बाहर निकलने में भी असहज महसूस करने लगे. उस समय सैस की उम्र लगभग 30 साल थी और वे एक फुटबॉल कोच के रूप में सक्रिय जीवन जीते थे.
वे रोजाना से जिम जाते थे और अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रखते थे. लेकिन इस बीमारी ने अचानक उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी. सबसे मुश्किल बात यह थी कि उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर उनके साथ क्या हो रहा है. जब उनके दोस्त घूमने-फिरने और छुट्टियां मनाने में व्यस्त थे, तब सैस अपनी सेहत को लेकर चिंतित रहते थे. उन्हें यह डर भी सताने लगा था कि क्या कोई ऐसा जीवनसाथी मिलेगा जो उनकी स्थिति को समझ सके. आखिरकार मार्च 2012 में डॉक्टरों ने उनकी बीमारी का पता लगाया और बताया कि वे क्रोहन डिजीज से पीड़ित हैं. यह एक ऐसी बीमारी है जो पाचन तंत्र को प्रभावित करती है और लंबे समय तक बनी रहती है. इसमें आंतों में सूजन हो जाती है, जिससे दर्द और अन्य गंभीर लक्षण पैदा होते हैं.
यह खबर सैस के लिए बेहद चौंकाने वाली थी. उन्होंने बताया कि यह सुनते ही वे अस्पताल में ही बेहोश हो गए थे. डॉक्टरों ने उन्हें दवाइयां और स्टेरॉयड दिए और साथ ही यह भी बताया कि आगे चलकर सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है. यह सुनकर कोई भी व्यक्ति घबरा सकता था, लेकिन सैस ने हार नहीं मानी.
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उन्होंने अपनी दिनचर्या और खानपान पर विशेष ध्यान देना शुरू किया. उन्हें महसूस हुआ कि पैकेज्ड और ज्यादा प्रोसेस्ड फूड उनकी समस्या को और बढ़ा रहे हैं. इसके बाद उन्होंने अपने आहार में बदलाव किया और घर का सादा और पौष्टिक खाना अपनाया. साथ ही, उन्होंने अपनी नींद और लाइफस्टाइल को भी बेहतर बनाने की कोशिश की.
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