नीम को आयुर्वेद में 'प्राकृतिक औषधियों का राजा' कहा जाता है। इसकी कड़वाहट जितनी ज़ुबान पर चुभती है, उतनी ही शरीर के लिए लाभकारी होती है। खास तौर पर नीम की पत्तियों में मौजूद एंटीबैक्टीरियल, एंटीफंगल और एंटीऑक्सीडेंट गुण कई गंभीर बीमारियों और स्किन प्रॉब्लम्स में रामबाण की तरह काम करते हैं।
भारत के अधिकतर घरों में नीम का पेड़ आमतौर पर मिल जाता है, लेकिन बहुत से लोग इसकी ताकत को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। अगर आप रोजमर्रा की ज़िंदगी में नीम की पत्तियों को किसी न किसी रूप में शामिल करें-चाय, काढ़ा, लेप या जूस के रूप में-तो कई छोटी-बड़ी समस्याओं से बचे रह सकते हैं।
नीम की पत्तियों में मौजूद एंटीसेप्टिक गुण मुंहासे, एक्ने, रैशेज और स्किन इंफेक्शन में राहत देते हैं। आप नीम की पत्तियों को पानी में उबालकर उससे चेहरा धो सकते हैं या उसका लेप बनाकर स्किन पर लगा सकते हैं। इससे स्किन साफ और निखरी रहती है।
नीम की पत्तियों का जूस या काढ़ा पीने से खून साफ होता है, जिससे शरीर की इम्युनिटी बढ़ती है। साफ खून का मतलब है कम पिंपल्स, एलर्जी और बीमारियों का खतरा। हफ्ते में 2-3 बार नीम का सेवन करना शरीर की अंदरूनी सफाई करता है।
नीम की पत्तियां ब्लड शुगर लेवल को बैलेंस करने में मदद करती हैं। रिसर्च में पाया गया है कि नीम का नियमित सेवन इंसुलिन की सक्रियता बढ़ाता है, जिससे डायबिटीज कंट्रोल रहती है। सुबह खाली पेट नीम के कुछ पत्ते चबाना बेहद फायदेमंद होता है।
नीम की पत्तियों में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो दांतों और मसूड़ों को स्वस्थ रखते हैं। पुराने समय में लोग नीम की दातुन से दांत साफ करते थे। इससे सांसों की बदबू, मसूड़ों की सूजन और कैविटी जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
नीम की पत्तियों का पेस्ट या उबला हुआ पानी स्कैल्प की सफाई करता है और डैंड्रफ को दूर करता है। यह बालों की ग्रोथ बढ़ाता है और स्कैल्प इंफेक्शन से भी बचाता है। हफ्ते में एक बार नीम का हेयर मास्क या नीम-पानी से बाल धोना लाभदायक होता है।
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