
New Delhi, 13 फरवरी . राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने Friday को इम्ताथुल्लाह नामक आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है. उस पर रामलिंगम हत्या मामले में शामिल हमलावरों और साजिशकर्ताओं को पनाह देने का आरोप है.
मार्च 2019 में प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्यों द्वारा रामलिंगम की निर्मम हत्या कर दी गई थी. इस घटना से तमिलनाडु में सांप्रदायिक सौहार्द और शांति को खतरा पैदा हो गया था.
हमले के तुरंत बाद एनआईए ने मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी. अब एजेंसी ने तमिलनाडु के डिंडीगुल जिले के रहने वाले इम्ताथुल्लाह के खिलाफ चेन्नई के पूनामल्ली स्थित विशेष एनआईए अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया है.
एनआईए के अनुसार, आरोपी ने यह जानते हुए भी कि हमलावर और साजिशकर्ता हत्या में शामिल थे, उन्हें शरण दी. यह हत्या तमिलनाडु के तिरुभुवनम में सांप्रदायिक तनाव और आतंक फैलाने की बड़ी साजिश का हिस्सा थी. जांच में पता चला कि आरोपी ने फरार घोषित अपराधियों (पीओ) को लगभग छह साल तक छिपाकर रखा, जबकि उसे उनकी भूमिका की जानकारी थी.
5 फरवरी 2019 को रामलिंगम पर जानलेवा हमला हुआ था. बताया गया कि उस दिन पीएफआई के सदस्य पक्कु विनायकम थोपु इलाके में जबरन धर्म परिवर्तन में लगे थे. रामलिंगम ने इसका विरोध किया, जिससे विवाद हो गया. इसके बाद उसी दिन पीएफआई ने उनकी हत्या की साजिश रची और हमला कर दिया.
अगस्त 2019 में एनआईए ने इस मामले में 18 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था. इनमें से छह आरोपी फरार थे और उन्हें घोषित अपराधी करार दिया गया था.
2021 में एनआईए ने एक फरार आरोपी को गिरफ्तार किया, जबकि आगे की जांच में 2025 में तीन और आरोपियों को पकड़ा गया. जांच में सामने आया कि इन तीनों फरार आरोपियों को कोडाइकनाल के अंबूर बिरयानी रेस्टोरेंट में इम्ताथुल्लाह ने शरण दी थी. इम्ताथुल्लाह को अगस्त 2025 में गिरफ्तार किया गया.
एनआईए ने 2025 में बाकी फरार आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया है और अब भी प्रतिबंधित पीएफआई से जुड़े अन्य लोगों और साजिशकर्ताओं की पहचान कर उन्हें कानून के दायरे में लाने के प्रयास जारी हैं.
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एएमटी/एमएस
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