8th Pay Commission News: सरकारी कर्मचारियों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। क्या आठवें वेतन आयोग का फायदा मिलने में अभी और देरी होगी? इस सवाल का जवाब खुद सरकार की ओर से मिल गया है। व्यय सचिव वी वुअलनाम ने मंगलवार को साफ कर दिया है कि आठवें वेतन आयोग ने अपना काम अभी बिल्कुल शुरुआती स्तर पर शुरू किया है। यही वजह है कि हालिया बजट में इसके लिए फिलहाल कोई अलग से प्रावधान या फंड नहीं रखा गया है।


अभी शुरुआती चरण में है काम

सचिव वुअलनाम के मुताबिक, आठवें वेतन आयोग का गठन इसी साल जनवरी में हुआ है। अभी सदस्य अपनी टीम तैयार कर रहे हैं और अधिकारियों को साथ जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि इसका खजाने पर कितना असर पड़ेगा, क्योंकि अभी तक वेतन संरचना या कर्मचारियों की मांगों का विश्लेषण और कैलकुलेशन शुरू ही नहीं हुआ है। बता दें कि आयोग को अपनी रिपोर्ट फाइनल करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है और उम्मीद है कि इसकी सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 से लागू हो सकती हैं।


कर्ज और राजकोषीय घाटे पर सरकार की नजर

अर्थव्यवस्था की सेहत को लेकर सचिव ने कहा कि सरकार ‘कर्ज-जीडीपी अनुपात’ (Debt-to-GDP Ratio) को मुख्य गाइड के रूप में देख रही है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक इसे 50 प्रतिशत के करीब लाया जाए। हालांकि, उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि इसका मतलब यह नहीं है कि सरकार राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) को नजरअंदाज करेगी। दोनों चीजें आपस में जुड़ी हुई हैं और सरकार पूरी सावधानी के साथ इन आंकड़ों पर नजर रख रही है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए कर्ज-जीडीपी अनुपात 55.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।


इंटर्नशिप योजना और बजट के आंकड़े

बजट में घोषित इंटर्नशिप योजना पर बात करते हुए सचिव ने कहा कि यह एक बेहतरीन और नई तरह की पहल है। हालांकि शुरुआत में इसकी रफ्तार थोड़ी धीमी लग सकती है क्योंकि इसमें उद्योगों की भागीदारी जरूरी है, लेकिन मंत्रालय लगातार कंपनियों के संपर्क में है। उन्हें पूरा भरोसा है कि जल्द ही इसमें तेजी आएगी और युवाओं को इसका बड़ा लाभ मिलेगा।


वास्तविक आंकड़ों पर आधारित है बजट

राजकोषीय घाटे में कमी और खर्चों में बढ़ोतरी के सवाल पर वुअलनाम ने कहा कि बजट में दिए गए सभी आंकड़े पूरी तरह वास्तविक हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए 53.5 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जो पिछले साल से 7.7 प्रतिशत ज्यादा है। सरकार ने राजकोषीय घाटे का लक्ष्य भी घटाकर 4.3 प्रतिशत कर दिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीडीपी ग्रोथ के जो अनुमान लगाए गए हैं, वे न तो बहुत ज्यादा महत्वाकांक्षी हैं और न ही बहुत ज्यादा सावधानी वाले, बल्कि वे पूरी तरह से यथार्थवादी हैं।

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